वन अधिकारी होने के बावजूद मुझे इस काम में कई दिक्कते आईं, क्योकि यहां वन नहीं, बल्कि मेरे सपनों की बगिया बसाने की बात थी। हमारे लिए पेड़ों के बीच के खाली जगह की सजावट सबसे चुनौतीपूर्ण काम था। करीब 500 मीटर लंबे क्षेत्र में हमने दूसरे पेड़ों के साथ ज्यादातर कदंब के पेड़ लगाए। जमीन के भीतर पेड़ों की जड़ें आपस में न उलझें, इसके लिए हमने पर्याप्त दूरी बनाए रखी, ताकि उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह प्रदान की जा सके।
हर पेड़ को वैज्ञानिक माप के साथ रोपित कर पाना बागवानों के लिए इतना आसान काम नहीं था, जिसके लिए मैं अपनी ड्यूटी से वक्त निकालकर कम से तीन-चार घंटे उनके साथ जुटा रहता था। पौधे रोपित करने के करीब तीन साल बाद आज हमारा इलाका एक बगीचे के स्वरूप में दुनिया के सामने है, जिसमें हरी घास, छायादार पेड़, फूलवारी, खूबसूरत आकार वाले बाड़े शामिल हैं। मैं भाग्यशाली हूं कि मेरी मौजूदा कॉलोनी में कई समृद्ध परिवार हैं।
प्रत्येक परिवार हरियाली के लिए अपने इलाके की सूरत बदलने की योजना में मेरे साथ है। वैसे तो इस पूरे बदलाव के लिए हमने सोसाइटी में इकट्ठा हुए चंदे का ही प्रयोग किया है, लेकिन जब भी कभी धन की अतिरिक्त जरूरत पड़ी, मैं अपना धन खर्च करने में कतई नहीं हिचकिचाया।
एक और खास बात, हमने किसी भी प्रकार की अन्य एजेंसियों को शामिल नहीं किया, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट। यह विशुद्ध रूप से हमारी सोसाइटी का अपना निजी प्रयास था। पिछले कुछ महीने से मैं लोगों को खुशहाली के मायने समझाने हेतु प्रेरित भी कर रहा हूं। मेरा मानना है कि खुशहाली बिना अच्छे स्वास्थ्य के नहीं आ सकती और अच्छे स्वास्थ्य का संबंध सीधे तौर पर आपके परिवेश के पर्यावरण से है।