फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'मेरा मानना है कि खुशहाली का संबंध सीधे तौर पर आपके परिवेश के पर्यावरण से है'

Thu, 24 May 2018 11:42 AM IST
वाई सत्यम
विज्ञापन
Y Satyam
विज्ञापन

चार साल पहले जब मैं भोपाल के चार इमली इलाके के अपने सरकारी बंगले से होशंगाबाद रोड स्थित नए घर में रहने आया था, तब यह इलाका बिल्कुल रेगिस्तान सरीखा था। गिनती के घरों में बहुत कम लोग ही रहते थे। पेड़-पौधे के नाम पर बस झाड़ियां थीं। मेरे जैसे ऑन ड्यूटी वन संरक्षक अधिकारी के लिए ये नजारे परेशान करने वाले थे।

विज्ञापन


अपने नए ठिकाने के पास पार्क के नाम पर आवंटित करीब बारह हजार वर्ग फुट बंजर जमीन की सूरत बदलने का मैंने न सिर्फ बीड़ा उठाया, बल्कि उसे एक हरे-भरे बगीचे में तब्दील करके ही काम खत्म किया। अब इसे मेरे पेशे का प्रभाव मानिए या मेरा सिद्धांत, मैं हमेशा से एक ही सूत्र दोहराता रहा हूं- हरियाली अपनाओ, खुशहाली पाओ।

मैं मध्य प्रदेश के वन विभाग का रिटायर्ड मुख्य वन सरंक्षक अधिकारी हूं। समाज के लिए कुछ करने के उद्देश्य से ही मैं संघ सेवा आयोग से जुड़ा। इंडियन रेवेन्यू सर्विस समेत तीन विभिन्न सेवाओं में मेरा चयन हुआ था, पर मैंने आईएफएस इसलिए चुना, क्योंकि इस सेवा में मुझे अमीरों के साथ नहीं रहना था।
विज्ञापन


अपने पूरे कार्यकाल में मैंने हमेशा पूरी ईमानदारी से वनों के संरक्षण का काम किया है। मेरा काम सुर्खियों में तब आया, जब 2013 में मध्य प्रदेश के शहडोल सर्किल में मेरे विभाग ने गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था। दरअसल मेरे निर्देशन में विभाग ने उस वक्त वन बचाओ अभियान के अंतर्गत मात्र दस घंटों में 17,08,181 पौधे रोपित किए थे। हालांकि यह मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, क्योंकि शहडोल, उमरिया, अनूपपुर जैसे जिलों में चले उस अभियान में कुल 86,823 लोगों ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई थी।

विज्ञापन

वन अधिकारी होने के बावजूद मुझे इस काम में कई दिक्कते आईं, क्योकि यहां वन नहीं, बल्कि मेरे सपनों की बगिया बसाने की बात थी। हमारे लिए पेड़ों के बीच के खाली जगह की सजावट सबसे चुनौतीपूर्ण काम था। करीब 500 मीटर लंबे क्षेत्र में हमने दूसरे पेड़ों के साथ ज्यादातर कदंब के पेड़ लगाए। जमीन के भीतर पेड़ों की जड़ें आपस में न उलझें, इसके लिए हमने पर्याप्त दूरी बनाए रखी, ताकि उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह प्रदान की जा सके।

हर पेड़ को वैज्ञानिक माप के साथ रोपित कर पाना बागवानों के लिए इतना आसान काम नहीं था, जिसके लिए मैं अपनी ड्यूटी से वक्त निकालकर कम से तीन-चार घंटे उनके साथ जुटा रहता था। पौधे रोपित करने के करीब तीन साल बाद आज हमारा इलाका एक बगीचे के स्वरूप में दुनिया के सामने है, जिसमें हरी घास, छायादार पेड़, फूलवारी, खूबसूरत आकार वाले बाड़े शामिल हैं। मैं भाग्यशाली हूं कि मेरी मौजूदा कॉलोनी में कई समृद्ध परिवार हैं।

प्रत्येक परिवार हरियाली के लिए अपने इलाके की सूरत बदलने की योजना में मेरे साथ है। वैसे तो इस पूरे बदलाव के लिए हमने सोसाइटी में इकट्ठा हुए चंदे का ही प्रयोग किया है, लेकिन जब भी कभी धन की अतिरिक्त जरूरत पड़ी, मैं अपना धन खर्च करने में कतई नहीं हिचकिचाया।

एक और खास बात, हमने किसी भी प्रकार की अन्य एजेंसियों को शामिल नहीं किया, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट। यह विशुद्ध रूप से हमारी सोसाइटी का अपना निजी प्रयास था। पिछले कुछ महीने से मैं लोगों को खुशहाली के मायने समझाने हेतु प्रेरित भी कर रहा हूं। मेरा मानना है कि खुशहाली बिना अच्छे स्वास्थ्य के नहीं आ सकती और अच्छे स्वास्थ्य का संबंध सीधे तौर पर आपके परिवेश के पर्यावरण से है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें