मैं चाहता हूं कि बच्चे विज्ञान की शिक्षा से वंचित न रहें, खासकर उन गरीब परिवारों से आने वाले छात्र, जो अक्सर हालात के मारे होते हैं। ऐसे वंचितों से मैं शिक्षण शुल्क लेने की सोच भी नहीं सकता।
हालांकि मेरे लिए लगातार बच्चों को निःशुल्क पढ़ा पाना हमेशा आसान नहीं रहता। वक्त के साथ कोचिंग इंस्टीट्यूट के विकास की जरूरत पड़ती रहती है, जिसके लिए मैंने कई दफे कर्ज भी लिया है। फिलहाल मेरे इंस्टीट्यूट में छह कमरे हैं, जिनमें से भू-तल के दो कमरे कक्षा की तरह प्रयोग किए जाते हैं, बाकी ऊपरी तल के कमरों को प्रयोगशाला का स्वरूप दिया गया है। मैं इन प्रयोगशालाओं को भौतिकी के तमाम उपकरणों से लगातार समृद्ध बनाता रहता हूं। मेरे कुछ पुराने छात्र भी मेरी मदद करते रहते हैं। अभी हाल ही में मेरे पढ़ाए एक छात्र ने मेरे इंस्टीट्यूट को फंक्शन जनरेटर उपहार स्वरूप दिया है।
बच्चों के भीतर भौतिकी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मैं अपने छात्रों के साथ मिलकर पूरे जिले के विभिन्न स्थानों पर साइंस क्विज और प्रदर्शनियां लगाता रहता हूं। मैं मानता हूं कि विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए कोई भी प्रयास पर्याप्त नहीं हो सकता। किसी भी विज्ञान की कुदरती फितरत विलुप्त होने की है, इसलिए मैं छात्रों को जितना संभव हो सके, इसके प्रति आकर्षित करने की कोशिश करता हूं। शिक्षकों से मेरा आग्रह है कि वे अपनी गंभीर जिम्मेदारी ईमानदारीपूर्वक निभाएं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आाधारित।