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मॉडेस्टी ब्लेज और विली गार्विन की कहानी

Sun, 25 Mar 2018 03:39 PM IST
रवींद्र दुबे
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इंदौर के बाशिंदे दम साधकर दूसरे दिन सुबह एक हिंदी अखबार विशेष का इंतजार करते थे। अखबार में देश-प्रदेश की रोजमर्रा की सामान्य खबरें ही हुआ करती थीं, लेकिन वे इस प्रतीक्षा की वजह नहीं थीं। वजह थी कि उसमें मॉडेस्टी ब्लेज की एक स्ट्रिप शनिवार के अलावा रोजाना छपती थी। इसके रचयिता थे पीटर ओ डोनेल। उसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उक्त अखबार के प्रधान संपादक खुद ही रोजाना उस स्ट्रिप का हिंदी अनुवाद कर उसे छपने के लिए देते थे। जब एक कहानी पूरी हो जाती, तब अगली कहानी छपती थी। रोज सुबह पाठक उसे ध्यान से पढ़ते, जिससे उसके मुख्य किरदार मॉडेस्टी ब्लेज और विली गार्विन लोकप्रिय हो गए। 

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1945 में एक बेनाम किशोरी कालीरोस (ग्रीस) के विस्थापित लोगों के शिविर से भाग निकलती है। उसे उसके छोटे से अतीत के बारे में कुछ भी याद नहीं होता और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के मेडिटरेनियन, मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका के इलाकों में घूमती भटकती वह मुश्किल तरीके से जीना सीख लेती है। दूसरे भटकते हुए शरणार्थी लोब से उसकी दोस्ती हो जाती है। लोब एक हंगेरियाई यहूदी है और बुडापेस्ट का विद्वान भी। वह उसे शिक्षा के साथ-साथ उसका पहला नाम देता है- मॉडेस्टी। अपना उपनाम ब्लेज वह खुद बाद में चुनती है। लोब की मृत्यु कब होती है, यह स्पष्ट नहीं है। 1953 में टेन्जियर में वह हेनरी लोचे से एक अपराधिक गिरोह का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेती है और ‘द नेटवर्क’ नामक एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में उसका विस्तार करती है। 

नेटवर्क चलाने के वर्षों के दौरान उसकी मुलाकात विली गार्विन से होती है। उसकी उजबक जीवन शैली के बावजूद वह उसमें संभावनाएं देखती है और उसे नौकरी का ऑफर देती है। खुद में उसकी आस्था से प्रेरित होकर नेटवर्क में वह उसका दाहिना हाथ होने के साथ-साथ उसका सर्वाधिक विश्वस्त मित्र बन जाता है। पारस्परिक आदर और विभाजित हितों पर आधारित यह संबंध बिल्कुल अफलातूनी या आत्मिक है। केवल विली ही उसे ‘राजकुमारी’ कहकर संबोधित कर सकता है ,जबकि गिरोह के अन्य सदस्य मॉडेस्टी को मैडम कहकर बुलाते हैं। यद्यपि उनके संबंधों में सेक्स का कोई तत्व नहीं है, मॉडेस्टी के अन्य कई प्रेमी विली से ईर्ष्या रखते हैं , क्योंकि वही एकमात्र व्यक्ति है, जो उसके जीवन का एक हिस्सा है, जबकि प्रेमी आते जाते रहते हैं। इसी तरह विली की कुछ प्रेमिकाएं शुरुआत में मॉडेस्टी से जलन महसूस करती हैं , लेकिन बाद में उनकी समझ में बात आ जाती है। 

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बेरूत में एक अंग्रेज से शादी कर उसे तलाक देकर वह ब्रितानी नागरिकता हासिल करती है। साल भर बाद उसका पति जेम्स टर्नर शराब पी-पी कर मर जाता है। जब मॉडेस्टी को लगता है कि उसने पर्याप्त पैसा बना लिया है, वह रिटायर होकर इंग्लैंड में बस जाती है। यही विली गार्विन भी करता है। बेकार और आलसी धनाढ्यों के बीच बीत रही जिन्दगी से उकता कर वे ब्रिटिश सीक्रेट सर्विस के उच्च पदाधिकारी सर जेराल्ड टैरंट का अनुरोध स्वीकार कर लेते हैं। यहीं पर कहानी यथार्थ में शुरू होती है। मॉडेस्टी की नेट वर्थ 1963 में पांच लाख पाउंड है। वह लंदन के हाइड पार्क के पास एक पेंटहाउस में रहती है और उसके पास टेन्जियर में एक विला भी है। बेनिल्डन, विल्टशायर से दो मील दूरी पर एक कॉटेज की भी वह मालकिन है। उसका कद पांच फुट छः इंच और वजन 54 किलो है। 

उसके कई अभियान उन मामलों के हैं, जिनमें वह और विली गार्विन टैरंट के साथ अपने संबंध के कारण संलिप्त हैं। हालांकि वे अजनबियों की भी मदद करते हैं और अगर कारण उनके मूल्यों के तहत आता हो, तो खुद से ही कई आकर्षक स्थानों पर सरफिरे खलनायकों से लड़ते हैं। समय-समय पर उनके नेटवर्क के अतीत से कई भूत भी उभरते रहते हैं। यद्यपि मॉडेस्टी और विली जरूरत पड़ने पर हत्या करने से भी नहीं चूकते, इसके लिए वे शारीरिक युद्ध एवं अस्त्र-शास्त्रों के अपने असाधारण कौशल का उपयोग करते हैं। कॉमिक स्ट्रिप और उपन्यासों  में ऐसे अनेकों अवसर आए हैं , जब इन दोनों ने समय से काफी पहले ही तय कर लिया है कि उन्हें जबरदस्त ताकत का इस्तेमाल करना है या कम घातक तरीकों का। विली और मॉडेस्टी की लड़ाइयों में निशस्त्र युद्ध और असाधारण हथियारों पर काफी जोर होता है। मॉडेस्टी का प्रिय हथियार है कांगो या यावारा छड़ी और अग्नेयास्त्रों में वह कोल्ट .32 रिवाल्वर या मॉब ब्रेवेट .32 ऑटोमेटिक पिस्तौल को तरजीह देती है , हालांकि बाद की कुछ किताबों में वह स्टार पी डी .45 ऑटोमेटिक पिस्तौल लेकर चलती हुई बताई जाती है। विली का पसंदीदा हथियार फेंकने वाले चाकू हैं, जो वह अमूमन दो लेकर चलता है। अन्य कई अजीब हथियार जैसे क्वार्टर स्टाफ, एपी, ब्लो गन और स्लिंग और  लड़ने के अप्रत्याशित तरीके भी दिखाई पड़ते हैं। 

पीटर ओ’डोनेल ने युद्ध में अपने सेवाएं देते हुए मिडिलईस्ट में एक लडकी को देखा और उसी समय उनके दिमाग में मॉडेस्टी का चरित्र रचने का विचार आया। लेकिन कॉमिक स्ट्रिप के लिए किसी अच्छे कलाकार का होना जरूरी था। पीटर ने जिम हैल्डवे के साथ काम करना तय किया, जो उन्हें संतुष्ट करने में असफल रहे। मॉडेस्टी ब्लेज ने 13 मई 1963 को लंदन के इवनिंग स्टैंडर्ड से आगाज किया। जोहानेसबर्ग स्टार, डेट्रॉइट प्री प्रेस, द स्टार (मलेशिया), द वेस्ट ऑस्ट्रेलियन (पर्थ) और द इवनिंग सिटीजन (ग्लासगो, स्कॉटलैंड) में यह  कॉमिक स्ट्रिप सिंडिकेट हुई। भारत में इसके तीन ग्राहकों बॉम्बे समाचार, द टेलीग्राफ (कलकत्ता), नई दुनिया (इंदौर) की मालूमात है। 

1970 में जिम हैल्डवे की मृत्यु के बाद स्ट्रिप का काम स्पेनिश कलाकार एनरिके बदिया रोमेरो ने किया। आठ साल बाद रोमेरो ने अपना खुद का कॉमिक्स प्रोजेक्ट शुरू करने की खातिर काम छोड़ दिया। 1986 तक स्ट्रिप नेविल काल्विन ने बनाईं। फिर रोमेरो की वापसी हुई और काम अंत तक चला। अंतिम स्ट्रिप ईवीनिंग स्टैण्डर्ड में 11 अप्रैल 2001 को छपी। कुछ अखबारों ने जिनमें यह सीरीज शुरू से चली थी, उन्होंने इसे फिर से शुरू से छापना शुरू कर दिया, क्योंकि इसे नियमित रूप से पढ़ना उनके पाठकों के लिए परंपरा बन गया था। ईवीनिंग स्टैंडर्ड ने 1 दिसंबर 2008 से पहली कहानी ला मशीन को फिर से प्रकाशित किया। हालांकि अखबार की मिल्कियत बदल जाने के कारण वे अगली कहानियां जारी नहीं रख पाए। कहना न होगा कि इन अखबारों के पाठकों को कितनी निराशा हुई होगी। 
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