इस सब के बीच जानवरों से मेरा प्यार बढ़ता गया। मैंने कई जानवरों के साथ खुद की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जिसे हर जगह से प्रोत्साहन मिला। इससे मेरा हौसला बढ़ता गया और मैं इसी दिशा में कोई नया कदम उठाने के लिए प्रेरित हुआ। उस वक्त मैं कॉलेज में बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था। और साथ-साथ ही कुत्तों के लिए होटल खोलने का मेरे दिमाग में एक ख्याल चल रहा था।
मैंने वह पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी, क्योंकि बीकॉम करने के बाद मैं वह काम नहीं करता, जो मैं करना चाहता था। आखिरकार नवंबर, 2015 में मैंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर अपना कुत्तों के लिए होटल खोल दिया। यह होटल कुत्तों के लिए एक आवासीय स्थल है, जहां वे जलवायु-नियंत्रित, ध्वनि रहित माहौल में रह सकते हैं, अपने लिए विशेष स्विमिंग पूल में डुबकी लगा सकते हैं और पार्लर में संवर भी सकते हैं। मैं इस होटल से होने वाली आय का इस्तेमाल दूसरे जरूरतमंद जानवरों के बचाव में खर्च करता हूं।
सैकड़ों सांप समेत मैंने कई प्रकार के पशुओं को बचाया है, उनका इलाज किया है। लोग घायल जानवर देखकर मुझे इत्तला करते हैं। मेरे घरवालों को भी कभी मेरे काम से शिकायत नहीं रही। मगर हां, कोई नौकर मेरे घर में नहीं टिक पाता, क्योंकि हर दिन जंगली जानवरों का सामना करने की हिम्मत सबमें नहीं होती।
मैं चेन्नई के दूसरे पशु कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नए स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करता हूं, जो वन्य जीवों के जीवन रक्षा का काम करते हैं। मेरा कोई भी पड़ोसी किसी जानवर को परेशान करने की हिम्मत नहीं करता। एक तरह से उनमें मेरी दहशत है। उन्हें अच्छी तरह से पता है कि यदि वे ऐसा करेंगे, तो मैं तत्काल पुलिस बुला लूंगा। मैं मानता हूं कि वन्य जीवों की तरह सामान्य पशुओं के अधिकारों के लिए भी मौजूदा पुराने कानूनों का अद्यतन आवश्यक है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।