स्कूलों में बच्चियों के व्यवहार पर नजर रखना इसलिए भी जरूरी होता है, क्योंकि वहां वे दिन का एक बड़ा हिस्सा गुजारती हैं। बच्चियों से अलग से बात की जाती है। टीम की महिलाएं उन्हें चॉकलेट और बैग देती हैं और उनके सामने यौन हिंसा के लिए अपराध शब्द का इस्तेमाल नहीं करतीं, क्योंकि इससे वे डर सकती हैं। उनसे हमारी बातचीत बेहद औपचारिक होती है, और हम उनसे यह जानकारी भी लेना चाहती हैं कि उनके साथ कभी कुछ गलत तो नहीं हुआ।
दरअसल ऐसे नाजुक मामले में छोटी बच्चियों से बात करते हुए पहले उन्हें भरोसे में लेना पड़ता है। हम उन्हें समझाती हैं कि अगर कोई छात्र, शिक्षक या कोई और पुरुष स्कूल के शौचालय या किसी अंधेरे कोने में उन्हें साथ चलने के लिए कहे, तो उन्हें फौरन इन्कार कर देना चाहिए। अगर कोई मर्द उन्हें गलत तरीके से छूता है, तो उन्हें चिल्लाना चाहिए और दूसरी बच्चियों को तभी सतर्क कर देना चाहिए। हम उन्हें प्रोत्साहित करती हैं कि ऐसी घटनाओं का जिक्र वे अपने अभिभावकों से जरूर करें।
हमारी इस मुहिम के कारण अनेक बच्चियों ने अपने अभिभावकों को गुड टच और बैड टच के बारे में बताया है। बच्चियों को चिल्ड्रेन हेल्पलाइन-1098 पर कॉल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है। हमारी इस पहल का बेहद सकारात्मक असर पड़ा है। यह टीम गुजरात के अलग-अलग स्कूलों में करीब दो हजार बच्चियों से बात कर चुकी है। इस बीच स्कूली बच्चियों के साथ यौन दुर्व्यवहार के अनेक मामलों में हमने दखल दिया है। हमने इस मुहिम की शुरुआत वड़ोदरा से की थी, लेकिन अब राज्य के दूसरे स्कूलों तक इसके प्रसार की हमारी योजना है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।