उन्होंने सहमति जताई और हमने मिलकर पिछले साल 'आरोग्य' संस्था की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य है- लोगों में बीमारियों के प्रति जागरूकता का प्रसार करना और उनका इलाज करना, जिसमें स्तन कैंसर के मरीजों तक पहुंचना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है।
दरअसल भारत में स्तन कैंसर से पीड़ित दस में से आठ महिलाएं बीमारी होने के बाद पांच साल से ज्यादा वक्त तक बड़ी मुश्किल से ही जीवित रह पाती हैं। कारण यही होता है कि उन्हें अपने मर्ज की पहचान ही नहीं होती और जब तक उन्हें पता चलता है, तब तक देर हो चुकी होती है। मैंने अपने काम को इसी समस्या पर केंद्रित रखा है। हमारा शुरुआती कार्यक्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश रहा।
फिलहाल हम अपने बारह स्वयं सेवकों की मदद से अपने काम का दायरा पंजाब, पश्चिम बंगाल और मेघालय तक बढ़ा रहे हैं। अब तक कुल 1,759 लोगों को हमारी ओर से मदद प्राप्त हो चुकी है। ये ऐसे मरीज हैं, जिनके रोग की न सिर्फ समय पर पहचान हो सकी है, बल्कि हमने अपने सहयोगी अस्पतालों में उनके इलाज की भी व्यवस्था की है।
इसके अलावा हमारी टीम कोशिश करती है कि स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की सभी जरूरतें पूरी हों और उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण होता रहे। हमारी टीम का हर एक सदस्य ग्रामीण स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने के लिए कृत संकल्प है।