उन्होंने मुझसे और अन्य ग्रामीणों से पक्षियों के व्यवहार संबंधी कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की थीं। मेरे काम में उनकी प्रेरणा का भी हाथ है। अपने काम को और बेहतर करने के लिए मैं कई शोध परियोजनाओं का हिस्सा बना। इससे मुझे सभी पक्षियों के वैज्ञानिक नाम मालूम हुए। मेरा काम देखते हुए वन विभाग ने मुझे अभयारण्य की देखभाल करने की नौकरी दे दी। बरसों तक मैं अपनी पत्नी के साथ जंगल के काम में मगन रहा। हम दोनों को अपने काम की ईमानदारी के लिए कई पुरस्कार भी मिले।
हम कोई ऐसा काम नहीं कर रहे थे, जिससे खूब आमदनी हो। मगर हमने जो कमाया, वह अमूल्य था। जाने-माने फिल्मकार सुरेश एलमन ने हमारे जीवन पर आधारित एक खूबसूरत वीडियो भी बनाया। बदकिस्मती से मेरी पत्नी आज जीवित नहीं है। मरने से पहले उसने मुझसे यह वायदा लिया था कि मैं ताउम्र पक्षियों के लिए ही काम करूंगा।
किसी व्यक्ति के काम में उसकी पत्नी की भागीदारी का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है! दशकों के अनुभव ने मुझे चिड़ियों की दो सौ से अधिक प्रजातियों के रहन-सहन, भोजन और व्यवहार का ठीक-ठाक जानकार बना दिया है। कंुथानकुलम पक्षी अभयारण्य में समय-समय पर पक्षियों के आकर्षण में कई प्रकृतिप्रेमी, फिल्मकार और छायाकार आते रहते हैं। इन सबको मेरी जरूरत पड़ती है। ये लोग प्यार से मुझे बर्डमैन कहकर पुकारते हैं। आजकल की नई पीढ़ी का व्यवहार देखकर मुझे चिंता होती है। यद्यपि सरकार पक्षियों के संरक्षण के लिए थोड़ा-बहुत काम कर रही है, लेकिन इस दिशा में सामुदायिक स्तर पर कोई पहल नहीं दिखती।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।