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गरीबी से लड़कर बने अधिकारी, निःशुल्क कोचिंग चलाकर छात्रों को सरकारी नौकरी पाने में कर रहे हैं मदद

Sun, 15 Apr 2018 01:39 AM IST
के. मारीमुत्थु
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K Marimuthu
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वर्ष 2010 में राममूर्ति मेरे दफ्तर के परिसर में गाय चरा रहा था। मैंने उससे बात की, तो पता चला कि वह इंटर पास है। मैंने उसे बताया कि तुम इतना पढ़ चुके हो कि ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारी तो बन ही सकते हो। फिर केवल गाय चराने में अपनी ऊर्जा क्यों गंवा रहे हो। वह मेरी तरफ आश्चर्य से देखने के बाद बोला कि उसे तो यह पता ही नहीं था कि वह कोई अधिकारी बनने की योग्यता हासिल कर चुका है।

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मैंने उसे अपने निःशुल्क कोचिंग केंद्र से जुड़ने का न्योता दिया। अगले दिन वह मेरी कक्षा में आया और बिना पीछे मुड़े कुछ ही महीनों में ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारी बन गया। राममूर्ति मेरे द्वारा पढ़ाए गए हजारों छात्रों में से एक है। अनेक छात्र आज विभिन्न विभागों में अधिकारी बन कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मैं दक्षिणी तमिलनाडु के विरुधूनगर जिले में तैनात एक तहसीलदार हूं। मेरी परवरिश विरुधूनगर के ही एक छोटे-से गांव वतरप के गरीब परिवार में हुई है। हमारे परिवार के लिए गरीबी तब और दुखदायी हो गई, जब मेरे पिता लगातार बीमार रहने लगे। मेरी मां ने ही काम करके पूरे परिवार को पाला है। विपरीत परिस्थितयों में मैंने खूब मन लगाकर पढ़ाई की और तहसीलदार बनने तक का सफर पूरा किया।

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मैंने सफलता पाने के अपने प्रयास से बहुत-सी ऐसी बातें सीखीं, जो किसी भी संसाधनहीन गरीब छात्र के लिए उपयोगी हो सकती थीं। मैंने सोचा क्यों न सरकारी नौकरी पाने का सपना संजोए दूसरे गरीब छात्रों की भी मदद की जाए! वैसे भी हमारे जिले के अधिकतर गरीब छात्र सरकारी नौकरी पाने की जद्दोजहद करने का साहस जुटा नहीं पाते हैं। वैसे तो हमारे जिले में कृषि ही अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, लेकिन इसी जिले में स्थित है शिवकाशी, जो कि पटाखे, माचिस और मुद्रण उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

यहां अधिकतर लोग या तो किसानी करते हैं या फिर शिवकाशी में कोई काम ढृंढ लेते हैं। करीब ग्यारह साल पहले अधिकारी बनकर मैंने एक विशेष गर्व का अनुभव किया। मगर मैं यह अनुभव उन युवाओं को भी कराना चाहता था, जो पटाखा फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। इसके लिए उन लोगों को निःशुल्क कोचिंग देने का फैसला किया। तब से लेकर अब तक मैंने लगभग तीन हजार लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने में सहायता की है, जिसमें से मेरे पढ़ाए दर्जनों छात्र विरुधूनगर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस में ही काम करते हैं। मैं जरूरतमंदों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः पूछे जाने वाले गणित, विज्ञान, इतिहास, तमिल और अंग्रेजी व्याकरण जैसे सभी विषयों की कोचिंग देता हूं।

मेरी कक्षाएं सप्ताहांत में दो दिन चलती हैं, लेकिन मैं खुद को अपडेट रखने के लिए हर रोज सुबह-शाम क्लास की तैयारी करता हूं। मैं अपनी कक्षाएं कलेक्ट्रेट परिसर के एक भवन में आयोजित करता हूं, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग एक साथ पढ़ाई कर सकें। कई छात्र तो काफी दूर से आते हैं। मेरी कक्षाओं में दसवीं में पढ़ने वाला बालक भी होता है और पीएचडी शोधार्थी भी होते हैं। ये सभी एक साथ एक स्तरीय कोचिंग लेते हैं। मेरा पढ़ाया कोई भी छात्र जब सफल होता है, तो वह मेरे लिए सबसे सुखद पल होता है। छात्रों की सफलताएं मुझे आगे और बेहतर करने की प्रेरणा देती हैं।
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