मेरी कार के अंदर का तापमान किसी भी नॉन एसी कार के मुकाबले बहुत कम रहने लगा। एक वक्त ऐसा भी आया, जब मुझे किसी वजह से पैसों की सख्त जरूरत थी और मुझे अपनी टैक्सी तक बेचनी पड़ गई थी। उसके बाद से मैं किराये की टैक्सी चला रहा हूं। मोटरमालिक को मेरा पुराना शौक पता था, सो उसने मुझे अपनी गाड़ी में पौधे लगाने की इजाजत दे दी। मैं बचपन से ही अनेक संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले पौधारोपण कार्यक्रमों में हिस्सा लेता रहा हूं।
और हर कार्यक्रम में मैं महसूस करता हूं कि पौधे तो खूब लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल कोई नहीं करता। मैं अपनी सवारियों से भी आग्रह करता हूं कि वे न सिर्फ पौधे लगाएं, बल्कि उनकी देखभाल भी करें। मैं उनको पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों वाले पर्चे भी बांटता हूं। इन पर्चों में लिखे संदेश कविता के रूप में होते हैं। इसके अलावा मैं उन सवारियों को पौधे और बीज भी भेंट करता हूं, जो मेरी बातों को गंभीरता से लेते हैं।
दूसरे टैक्सी ड्राइवर, जो सवारियों से मीटर से भी ज्यादा किराया लेने की चेष्टा रखते हैं, कभी उन लोगों ने मुझे पागल तक कहा था, लेकिन उन्हीं में से अधिकतर आज मेरी तारीफ करते नहीं थकते। मैं ‘आमरा सबुज साथी’ (हम हरियाली के दोस्त) नाम से एक एनजीओ भी चलाता हूं, जिसका यही मकसद है कि लोगों के बीच यह संदेश जाए कि कोई भी कहीं भी पौधा लगा सकता है। हमें इसके लिए विशाल बगीचों की आवश्यकता नहीं है। प्रकृति हमारी सबसे अच्छी दोस्त है, इसे नष्ट मत करें। मानव जाति के लाभ के लिए प्रकृति को बचाएं।