मेरी गतिविधियों से हजारों लोगों को फायदा हुआ। मेरे एक वीडियो की मदद से डेढ़ साल की बच्ची आयशा के चेहरे पर मुस्कान आ सकी थी। उसके परिवार वाले उसकी सर्जरी करवा पाने में समर्थ नहीं थे। मैंने उनकी पीड़ा अपनी आवाज में रिकॉर्ड करके फेसबुक पर साझा की। कई दानदाता सामने आए, नतीजतन एक महीने के भीतर बच्ची के इलाज के लिए जरूरी धन इकट्ठा हो गया। ऐसे ही एक वाकया कोझिकोड का है। वहां रहने वाले मुनीर बेहद गरीबी में जी रहे थे। उनके सिर पर तीन बेटियों की शादियों का बोझ था। मुनीर के लिए मैंने लोगों से दान देने का आह्वान किया। यहां भी मेरे वीडियो ने असर दिखाया। मुनीर की एक बेटी की शादी हो चुकी है, दूसरे की सगाई हो गई है, जबकि दान की मदद से मुनीर का अपना घर भी बन चुका है।
हालांकि मैंने कई तरह की चुनौतियों का भी सामना किया। सोशल मीडिया पर वीडियो ब्लॉगिंग करने की कीमत मैंने अपने कई दोस्तों को खोकर चुकाई। मुझ पर लोगों ने सेलिब्रिटी
का तमगा हासिल करने की लालसा रखने का आरोप लगाया। मैं इन आरोपों से परेशान नहीं हुई, क्योंकि मुझे पता था कि मेरी असली इच्छा क्या है। मेरे परिवारवाले भी शुरू में मेरे काम से खुश नहीं थे। मां, बहनें सबने मुझे ये सब बंद करने को कहा। लेकिन जब मैंने किसी की बुलेट न चलाने की बात नहीं मानी थी, तो भला कैमरे के सामने कुछ बोलने का काम न करने का सवाल ही नहीं था। और पूर्व सैनिक मेरे पिता तथा मेरे पति तो मेरे साथ थे ही। उन्होंने मेरी हर बात से इत्तेफाक जताया। इन लोगों ने मुझे हमेशा बिना किसी से डरे बेबाक रहना सिखाया है।
मेरे क्रियाकलापों को देखते हुए कई लोग मुझे नारीवादी बुलाते हैं। मैं कोई नारीवादी नहीं हूं, मगर मैं उन तौर-तरीकों की प्रखर विरोधी हूं, जो महिलाओं को मुंह बंद रखने के लिए मजबूर करते हैं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।