विधानसभा के चुनावों में वोट के गणित के लिहाज से सबसे ज्यादा सेंधमारी कांग्रेस के मत प्रतिशत में हुई। विशेषज्ञों का कहना है ऐसी संभावना है कि इस बार कांग्रेसी वोटरों ने अपनी धुर विरोधी पार्टी भाजपा को भी वोट दिया है। शायद यही वजह है कि भाजपा का वोट प्रतिशत पिछले सालों की तुलना में बढ़ा है।
इस चुनाव में अगर पड़े कुल वोट के प्रतिशत को हिसाब किताब करेंगे तो सब कुछ साफ हो जाएगा। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार 53 फीसदी से ज्यादा मत आम आदमी पार्टी को पड़े। जबकि भाजपा का इस बार मत प्रतिशत 38 फीसदी से ज्यादा रहा। वहीं कांग्रेस का वोट प्रतिशत इस बार चार फीसदी के करीब रहा।
पिछले सालों से तुलना करें तो देखेंगे कि आम आदमी पार्टी का वोट बैंक तो बहुत हद तक एक जैसा ही है लेकिन कांग्रेस का वोट बैंक जबरदस्त तरीके से नीचे गिरा है। 2015 के चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत दस फीसदी के करीब था। जो इस बार चार फीसदी से थोड़ा सा ज्यादा है। वहीं भाजपा का 2015 में वोट प्रतिशत 32 फीसदी से थोडा सा ज्यादा था जो इस बार बढ़कर 38 फीसदी से ज्यादा हो गया।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. सुनील सिंह कहते हैं कि आंकड़ों को और वोट बैंक को अगर बहुत बारीकी से देखें तो स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस से खिसके हुए वोट का एक बहुत बड़ा हिस्सा या तो भाजपा में गया या फिर आप में गया हो। चूंकि आप में वोटों का प्रतिशत तकरीबन एक समान है ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि कांग्रेस के वोट प्रतिशत का एक हिस्सा भाजपा में गया होगा।