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बिहार: आरसीपी सिंह को मंत्री बनाए जाने की चर्चा के बाद जदयू में अध्यक्ष पद के लिए मंथन

Mon, 28 Jun 2021 03:48 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, पटना।

सार

जदयू की स्थापना के समय से ही पार्टी में नंबर एक की कुर्सी पर खुद नीतीश कुमार ही रहे हैं
आरसीपी सिंह ने 2013 में नीतीश कुमार की पार्टी को तोड़कर उन्होने अपनी पार्टी रालोसपा बनाई थी
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आरसीपी सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्रिमंडल में जदयू कोटे से पार्टी अध्यक्ष आरसीपी सिंह को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसको लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है।

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 खबर है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद आरसीपी ने नीतीश कुमार को अपनी मंशा से अवगत करवा दिया है। मोदी मंत्रिमंडल में जदयू से दो लोगों को शामिल किया जा सकता है।

आरसीपी सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल हो जाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ सकता है। आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद नीतीश कुमार को एक ऐसे साथी की जरूरत होगी जिस पर वो आंख मूंद कर भरोसा कर सकें। जदयू की स्थापना के समय से ही पार्टी में नंबर एक की कुर्सी पर खुद नीतीश कुमार ही रहे हैं।  
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इस समय आरसीपी सिंह के बाद उपेंद्र कुशवाहा हैं। लेकिन, मुश्किल ये है कि पदहीन उपेंद्र कुशवाहा तो नेतृत्व के लगाम में रहते हैं। लेकिन पद और शक्ति पाते ही उपेंद्र कुशवाहा लगाम तोड़ने लगते हैं। नीतीश कुमार से उपेंद्र ने कई बार दगा किया है साल 2013 में  नीतीश कुमार की पार्टी को तोड़कर उन्होने अपनी पार्टी रालोसपा बनाई थी।

उससे पहले वो पार्टी में नीतीश कुमार के बाद सबसे कद्दावर नेता थे और राज्यसभा का सदस्य भी थे। इससे पहले भी सन 2000 में उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार का साथ छोड़ा था और राष्ट्रीय समता पार्टी नाम से अपनी पार्टी बनाई थी।

2014  में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव परिणाम में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया था। उन्होंने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था।

लेकिन उनके साथ जल्द ही तालमेल टूट गया और फिर से नीतीश कुमार ने कमान संभाली। इस कड़वे अनुभव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भूले नहीं होंगे। इसलिए वे उपेंद्र कुशवाहा को शायद ही पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाएं। 2014 के चुनाव में कुशवाहा ने भाजपा से गठबंधन किया।  

मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री बने। यहां भी उनकी नहीं बनी।  मोदी से अलग होने के बाद बिहार विधानसभा चुनाव में जीरो पर आउट हुए कुशवाहा ने कुछ दिनों पहले ही जदयू में वापसी की है। सवाल उठता है कि उपेंद्र कुशवाहा नहीं, तो कौन? ऐसे में जदयू में किसी सवर्ण या दलित समुदाय से आनेवाले नेता को यह जिम्मेदारी मिल सकती है।

नीतीश के नेतृत्व में बिहार  बनेगा अग्रणी राज्य : नड्डा 
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय जनता दल पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, बिहार में हमें राजद के गुंडाराज और अपहरण उद्योग के खिलाफ बहुमत मिला है। राजद सरकार में अपहरण उद्योग के दौर से निकलकर आज हम खिलता हुआ, आगे बढ़ता हुआ बिहार देख रहे हैं। उन्होंने कहा, नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार अग्रणी राज्य बनेगा। 

बिहार भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए नड्डा ने पार्टी के नेताओं, पदाधिकारियों को सप्ताह में दो दिन कोरोना टीकाकरण बूथ का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी।

उन्होंने कहा, बूथों पर जागरूकता बढ़ाएं और लोगों को ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। इस दौरान भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव ने कहा कि जहां विपक्ष के लोग होम क्वारंटीन होकर सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी करते रहे, वहीं भाजपा युवा मोर्चा ने 88 जगहों पर रक्तदान किया।

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