राजधानी की खराब आबोहवा के बीच दिल्ली सरकार ने इसमें सुधार लाने के लिए नया फैसला लिया है। होटल व रेस्तरां के कोयले के तंदूर की जगह बिजली या गैस का तंदूर लगाने पर 50 फीसदी की सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों की इकाइयों को पीएनजी लगाने पर एक लाख रुपये तक सब्सिडी मिलेगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को पर्यावरण विभाग के इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेस्टोरेंट, ढाबा, बैंक्वेट हॉल समेत होटल के कोयले के तंदूर को इलेक्ट्रिक या गैस का तंदूर में बदलने के लिए विभाग ने एक प्रस्ताव किया था। इसके तहत 50 फीसदी या अधिकतम 5,000 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। योजना एक अप्रैल 2018 से लागू करने का ही प्रस्ताव है।
खास बात यह कि एक अप्रैल को या उसके बाद बनने वाले नए रेस्तरां समेत दूसरे खानपान स्थलों पर इलेक्ट्रिक या सीएनजी तंदूर लगाने वालों को भी योजना का फायदा मिलेगा। इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) पर होगी। सब्सिडी डीपीसीसी के अधीन बनाये गये एयर एम्बिएंस फंड से दी जाएगी।
औद्योगिक इकाइयों में पीएनजी लगाने पर मिलेगी इंसेंटिव
दिल्ली के औद्योगिक इलाकों की इकाइयों में पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार इंसेटिव देगी। बड़ी इकाइयों के लिए यह राशि एक लाख रुपये व छोटी के लिए 50,000 रुपये होगी। इस योजना का संचालन भी डीपीसीसी के जिम्मे होगा।
डीपीसीसी तय करेगा प्रक्रिया
डीपीसीसी को योजना की मानक प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करनी है। वहीं, सब्सिडी के लिए आवेदन पत्र व जांच रिपोर्ट भी डीपीसीसी के जिम्मे है। मानक पूरा करने वाले आवेदकों को ही सब्सिडी जारी की जाएगी। कैबिनेट से पारित प्रस्ताव में साफ किया गया है कि सिर्फ रेस्तरां, ढाबा, बैंक्वेट हाल, होटल संचालकों को मिलेगा, जो कानून दिल्ली में चल रहे हैं।
बजट भाषण में था योजना का जिक्र
2018-19 का विधा सभा में बजट पेश करते वक्त उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस योजना का ऐलान किया था। सिसोदिया ने कहा था कि सरकार कोयले को इलेक्ट्रिसिटी या गैस तंदूर में बदलने के लिये 5000 रुपये की सब्सिडी देगी।