पैरामिलिट्री फोर्स बुलाने में इतनी देर क्यों हुई, जबकि हिंसा के दौरान पांच अर्धसैनिक बलों की 163 कंपनियां दिल्ली में मौजूद थीं। ये सुरक्षा बल अधिकतम 50 मिनट में दिल्ली के किसी भी हिस्से में पहुंच सकते हैं। इन बलों के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली की हिंसा पर काबू पाने के लिए समय रहते हमें नहीं बुलाया गया।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ की करीब 26 कंपनियां तो सालभर दिल्ली में ही तैनात रहती हैं। ये कंपनियां वीआईपी ड्यूटी, धरना प्रदर्शन, रैली, संसद सत्र, दंगा फसाद और त्योहार आदि के बंदोबस्त में लगाई जाती हैं। इनके अलावा करीब 90 कंपनियां रिजर्व में रहती हैं। कह सकते हैं कि सीआरपीएफ की 116 कंपनियां दिल्ली-एनसीआर में हर समय मौजूद रहती हैं।
सशस्त्र सीमा बल एसएसबी का भी दिल्ली में मुख्यालय है। यहां पर हमेशा सात-आठ कंपनियां तैनात रहती हैं। किसी भी आपात स्थिति में निकटवर्ती यूनिट से अतिरिक्त कंपनियां बुला ली जाती हैं।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) एक कंपनी नोएडा और दूसरी गुरुग्राम के भौंडसी में हैं। कुल मिलाकर बीएसएफ की तीन बटालियन यानी 21 कंपनियां दिल्ली और सीमावर्ती इलाकों में मौजूद हैं।
अर्धसैनिक बल के एक आला अधिकारी का कहना है कि केवल यही नहीं, बल्कि आईटीबीपी की 12 कंपनियां भी दिल्ली में रहती हैं। इनमें से बहुत से जवानों को दिल्ली पुलिस की मदद के लिए अलग अलग तरह की ड्यूटी दी जाती है।