देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में वैश्विक महामारी कोरोना के कहर के साथ ही अब मलेरिया का भी प्रकोप बढ़ गया है। हालात यह है कि पिछले साल की तुलना में इस साल मलेरिया के दो गुना मरीज बढ़ गए हैं। इससे कोरोना को नियंत्रित करने में जुटी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को अब दो मोर्चे पर एक साथ लड़ना पड़ रहा है।
मुंबई में कोरोना को मात देने के लिए बीएमसी ने युद्धस्तर पर तैयारियां की, जिसका सकारात्मक प्रभाव भी दिखने लगा है। फिलहाल मुंबई में कोरोना के 19000 एक्टिव मरीज हैं, लेकिन, इस बीच मलेरिया का प्रकोप शुरू हो गया। बीएमसी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 20 जुलाई के बाद मलेरिया का प्रकोप अचानक बढ़ा है।
पिछले साल की तुलना में दोगुना मलेरिया के मरीज बढ़े हैं। बीते साल 01 जुलाई से 20 जुलाई के बीच 438 मरीज मिले, जबकि इस साल 01 जुलाई से लेकर 20 जुलाई तक 443 मरीज बढ़े। इस तरह इस अवधि में गत वर्ष की तुलना में सिर्फ 5 मरीज बढ़े थे।
लेकिन, 20 जुलाई से लेकर अब तक यह संख्या 873 हो गई है, जो गत वर्ष के मुकाबले दोगुना है। कोरोना संक्रमण के बीच बीएमसी ने जुलाई की शुरुआत में ही मच्छरों को मारने का अभियान शुरू किया था। झुग्गी-झोपड़ी, बस्तियों में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया था।
साथ ही, बीएमसी के प्रमुख अस्पतालों में बरसाती बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए 1500 बेड भी आरक्षित रखा गया। बावजूद इसके मलेरिया के रोगी बड़ी संख्या में सामने आए हैं। लेकिन, सुकून की बात यह है कि मलेरिया के अलावा अन्य रोग जैसे लेप्टो, गैस्ट्रो, डेंगू, हेपेटाइटिस और एच1एन1 के मरीजों की संख्या पिछले साल की तुलना में काफी कम हैं।
मुंबई के महापौर -किशोरी पेडणेकर का कहना है कि बीएमसी की जांच में पता चला है कि बड़ी सोसायटियों और घरों में अधिक संख्या में लोग मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं मिल रहे है। जबकि बीएमसी द्वारा चलाये गए अभियान से खुले स्थानों पर मलेरिया के मच्छर कम संख्या में मिले हैं।मलेरिया रोग को रोकने के लिए नागरिकों को खुद आगे आना चाहिए। बीएमसी की तरफ से पूरा सहयोग दिया जाएगा।