युवक के परिजनों ने एंबुलेंस चालक पर आरोप लगाए हैं।
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मध्यप्रदेश के खंडवा में समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से एक युवक की मौत ही गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल के एंबुलेंस के ड्राइवर ने डीजल नहीं होने के चलते परिजनों को लौटा दिया था। परिजनों के मुताबिक उनसे कहा गया था कि डीजल नहीं है, आगर आप डीजल लेकर आएंगे तो ही वह मरीज को लेकर जिला अस्पताल तक जा पाएंगे। ऐसे में परिजनों ने निजी वाहन की व्यवस्था की और मरीज को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक मरीज की मौत हो चुकी थी। बीएमओ ने आरोपों को निराधार बताया है।
जानकारी के अनुसार खंडवा के हरसूद थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले इमलानी गांव के कमलेश प्रजापति ने सोमवार सुबह आत्महत्या का प्रयास कर लिया था। कमलेश के परिजनों ने बताया कि वह समूह लोन और बाइक लोन के कर्ज से डिप्रेशन में था और इसी के चलते उसने सुबह जहरीला पदार्थ पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी। इसके बाद परिजन उसे लेकर हरसूद के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। वहां से उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था। परिजन राहुल प्रजापति ने बताया कि जब उन्होंने एंबुलेंस ड्राइवर से मरीज को लेकर चलने का कहा तो स्वास्थ्य केंद्र के एम्बुलेंस ड्राइवर ने उन्हें पहले डीजल लेकर आने का कहा।
'मरीज को संभालते कि डीजल लेने जाते'
परिजन राहुल ने आरोप लगाया कि वे मरीज के साथ अकेले अटेंडर थे, ऐसे में वे मरीज को संभालते या ड्राइवर के कहे अनुसार पहले डीजल लेकर आते। साथ ही उस समय उनके पास डीजल के लिए पैसे भी नहीं थे, जिस वजह से उन्हें स्वास्थ्य केंद्र की एंबुलेंस नहीं मिल पाई और उन्हें वहां से 15 किलोमीटर दूर अपने घर से फोन कर निजी वाहन बुलाकर मरीज को जिला चिकित्सालय तक लाना पड़ा। इसमें काफी समय लग गया और इसी देरी के चलते जिला अस्पताल पहुंचने तक मरीज कमलेश की मौत हो गई। परिजन राहुल प्रजापति के अनुसार यदि समय पर एम्बुलेंस मिल जाती तो उनके भाई को बचाया जा सकता था।
गलत आरोप लगा रहे
हरसूद स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ आशीष राज मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने मरीज के परिजनों के आरोपों को निराधार बताया। उनके अनुसार चूंकि मरीज ने आत्महत्या का प्रयास किया था इसी के चलते उसके परिजन मरीज को निजी वाहन से ले गए थे और अब वे इस तरह के आरोप लगा रहे हैं जो कि गलत हैं।