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इंदौर के इस बाजार में होती हैं हर जरूरत पूरी, दिन में बिकते हैं जेवर और रात में जायके

Sun, 19 Aug 2018 01:29 PM IST
भाषा, मध्य प्रदेश
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बामुश्किल 20 फुट चौड़ी और आधा किलोमीटर लम्बी गली में लज्जतों की विरासत से सजी कोई 250 दुकानें और इनमें सैकड़ों "चटोरों" की ठसाठस भीड़.... यह इंदौर की मशहूर सर्राफा चौपाटी है। नाम से धोखा मत खा जाइयेगा क्योंकि रिवायती जायकों की यह दुनिया सदी भर से हर रोज रात को तब आबाद हो रही है, जब सर्राफा बाजार में जेवरात की दुकानें बंद हो जाती हैं। 
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रात्रिकालीन सर्राफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष नंदकिशोर शिवगिरि ने बताया कि आपको पारम्परिक खान-पान की ऐसी जगह शायद कहीं नहीं मिलेगी, जहां पिछले 100 सालों से मांसाहारी व्यंजनों की, दुकानों पर सख्त मनाही है। आप पश्चिमी मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के अलग-अलग जायकों का लुत्फ सर्राफा चौपाटी में बेहद किफायती दामों पर ले सकते हैं। 

शिवगिरि का परिवार सर्राफा चौपाटी में मिठाइयों की दुकान चलाता है। उनकी दुकान में हालांकि चुनिंदा मिठाइयां उपलब्ध हैं। लेकिन स्वाद के इस रात्रिकालीन बाजार में परोसी जाने वाली मिठाइयों की फेहरिस्त लम्बी है... गुलाब जामुन, काला जामुन, शाही रबड़ी, कलाकन्द, मूंग का हलवा, मालपुए, मावा बाटी, बासुंदी, श्रीखण्ड, शिकंजी, फालूदा, राजभोग आदि। स्वाद के शौकीनों का पेट भर जाता है, पर मिठाई से मन नहीं भरता। 
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मुंह मीठा हो गया हो, तो अब कुछ नमकीन और चटपटा नोश फ़रमा लिया जाये। भुट्टे का "कीस", मटर और हरे चने की कचोरी और गराड़ू (तलकर पकाया जाने वाला दुर्लभ कंद जिसे चटपटा मसाला बुरककर और नींबू निचोड़कर परोसा जाता है) सर्राफा चौपाटी की खासियतों में शुमार हैं । 

वैसे "चटोरों के स्वर्ग" में दही बड़े, चाट पकौड़ी, पानी पूरी, दही पूरी, सेंव पूरी, पाव भाजी और छोले टिकिया की भी खूब दुकानें हैं। नयी पीढ़ी की पसंद के मुताबिक वहां मोमोज, नूडल्स, मंचूरियन और हॉट डॉग की दुकानें भी खुल गयी हैं। लेकिन मजे की बात यह है कि सर्राफा चौपाटी में इन "परदेसी" व्यंजनों को भी शुद्ध शाकाहारी रेसिपी के साथ खूब पारंपरिक मसाले डालकर कुछ इस तरह पकाया जाता है जिससे लगता है कि इनकी उत्पत्ति इंदौर में ही हुई हो। 

हर रोज रात आठ बजे के बाद जेवरात की दुकानें बंद होते ही सर्राफा बाजार, सर्राफा चौपाटी में बदल जाता है और इन दुकानों के बाहर खाने-पीने के प्रतिष्ठान सजने लगते हैं। स्वाद का यह पारंपरिक बाजार रात दो बजे तक खुला रहता है। सप्ताहांत और छुट्टियों के वक्त तो वहां इतनी भीड़ उमड़ती है कि पैर रखने की भी जगह नहीं मिलती। 

सर्राफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवगिरि ने कहा, "आम दिनों में रात दो बजे तक का समय हमारे कारोबार के लिये पर्याप्त है। हालांकि, प्रशासन से हमारी मांग है कि होली, नवरात्रि, दशहरा तथा दीवाली सरीखे बड़े त्योहारों और 31 दिसंबर की रात सर्राफा चौपाटी को तड़के चार बजे तक खुला रखने की अनुमति दी जाये।" 
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