महेश्वर में महेश्वरी साड़ी की कथित फर्जी बुनाई और दूसरे राज्यों में इसके नाम पर घटिया कपड़ा बेचने के विरोध में सैकड़ों बुनकरों ने रैली निकाली। बुनकरों ने जीआई टैग नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर महेश्वर की प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी की नकल और दूसरे राज्यों में हो रही कथित फर्जी बुनाई के विरोध में बुधवार को सैकड़ों बुनकर और हथकरघा कारीगर सड़कों पर उतर आए। बुनकरों ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और जिला हथकरघा कार्यालय को ज्ञापन सौंपकर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
रैली निकालकर जताया विरोध
बुनकरों का आरोप है कि दूसरे प्रदेशों के कुछ व्यापारी महेश्वर आकर यहां की बुनाई सीखते हैं और इसके बाद अपने क्षेत्रों में जाकर घटिया गुणवत्ता का कपड़ा महेश्वरी साड़ी के नाम से बेचते हैं। इससे असली महेश्वरी साड़ी की पहचान और साख प्रभावित हो रही है। साथ ही स्थानीय बुनकरों के सामने रोजगार और रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो रहा है। प्रदर्शन के बाद बुनकर प्रतिनिधियों ने पुलिस थाना, तहसील कार्यालय और जिला हथकरघा कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।
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जीआई टैग के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप
महेश्वरी साड़ी की पहचान बचाने का आश्वासन
जिला हथकरघा कार्यालय के उप संचालक राजकुमार सराफ ने बुनकरों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जीआई कानून के तहत महेश्वर क्षेत्र के बाहर इस नाम से कपड़ा तैयार करने या बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने आश्वासन दिया कि महेश्वरी साड़ी की ऐतिहासिक पहचान और मौलिकता को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। बुनकरों का कहना है कि महेश्वरी साड़ी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की विरासत और महेश्वर की पहचान है। उनका कहना है कि फर्जी बुनाई और बिक्री पर तत्काल रोक नहीं लगी तो इस पारंपरिक हुनर और स्थानीय बुनकरों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।