फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

व्यापम के बीच शिवराज के सामने ये है असली चुनौती

विज्ञापन
विज्ञापन
व्यापम घोटाले और इससे जुड़ी मौतों के कारण फजीहत झेल रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फिलहाल एक और परीक्षा के लिए खुद को तैयार करने में लगे हैं।
विज्ञापन


इस परीक्षा का संबंध चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है, लिहाजा नतीजे की चिंता भी ज्यादा है। दरअसल राज्य में दो उपचुनाव होने हैं। एक रतलाम लोकसभा और दूसरा देवास विधानसभा के लिए।

अभी तक ये दोनों सीटें सत्तारूढ़ भाजपा के पास ही थीं। रतलाम सीट दिलीप सिंह भूरिया और देवास सीट पूर्व मंत्री तुकोजीराव पवार के निधन के कारण खाली हुई है। उपचुनावों की अधिसूचना जारी होने में वक्त है, लेकिन शिवराज ने काम शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


विज्ञापन

उपचुनावों के नतीजे शिवराज के लिए लिटमस टेस्ट

प्रेक्षकों के मुताबिक शिवराज को मालूम है कि यदि इस परीक्षा में फेल हो गए तो उनके लिए जवाब देना मुश्किल होगा। इन नतीजों को व्यापम घोटाले और उनकी छवि से जोड़ा जाएगा।

लिहाजा इस बार चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर भाभरा (रतलाम-झाबुआ लोकसभा क्षेत्र में आजाद की जन्मस्थली ) में वह चुनाव का पूरा माहौल बना आए।

करोड़ों की योजनाएं मंजूर कीं और आदिवासियों के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, सब विस्तार से बताया। इतना ही नहीं सरकारी अंत्योदय मेले में लगे हाथ कांग्रेस की इस मांग पर खुद ही जनमत संग्रह भी कर लिया कि व्यापम घोटाले में क्या उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। लोगों ने हाथ उठाकर तुरंत ना में जवाब दिया।

आसान नहीं भाजपा की राह
इन चुनाव को लेकर भाजपा की राह आसान नहीं है। पार्टी की चिंता झाबुआ लोकसभा को लेकर है। एक तो दिलीप सिंह भूरिया के मुकाबले का उम्मीदवार ढूंढना मुश्किल है और दूसरा मेडिकल कॉलेज की छात्रा नम्रता डामोर की हत्या को आत्महत्या मानकर केस बंद करने का दाग शिवराज सरकार पर है।

नम्रता झाबुआ के मेघनगर की रहने वाली थी और आदिवासी थी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता भी कहते हैं, कि उपचुनावों के नतीजे शिवराज के लिए लिटमस टेस्ट हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें