देश में लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में मध्य प्रदेश की 10 सीटों पर 17 अप्रैल को मतदान किया जाएगा। प्रदेश में यह दूसरा चरण होगा।
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इसमें एक करोड़ 67 लाख मतदाता 142 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। बुंदेलखंड की इन दस सीटों में से दो सीटें ही कांग्रेस के पास रही हैं।
2009 में गुना और राजगढ़ सीटों के अलावा सभी सीटें भाजपा के पास थीं। भोपाल संसदीय सीट पर सबसे ज्यादा 19 लाख 55 हजार मतदाता हैं। सागर लोकसभा सीट पर सबसे कम 15 लाख 19 हजार मतदाता वोट करेंगे।
दस सीटों में से विधानसभाओं के प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाए तो भाजपा ने बड़ी संख्या में सीटें जीती हैं। लेकिन इनमें से गुना, भोपाल, सागर जैसी सीटों पर कांग्रेस अच्छी संभावनाएं मानकर चल रही है।
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वहीं दोनों दलों के कई दिग्गजों ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, जयभानसिंह पवैया, गोविंद राजपूत और नागेंद्र सिंह जैसे नेताओं का भविष्य दांव पर लगा है। दस सीटों का राजनीतिक समीकरण इस प्रकार है-
गुना, ग्वालियर, मुरैना सीट
गुनाः ज्योतिरादित्य सिंधिया (कां) का मुकाबला भाजपा के जयभानसिंह पवैया से है। पवैया कड़ी टक्कर दे रहे हैं। प्रचार के अंतिम दिन सुषमा स्वराज प्रकरण के पहले तक पवैया कड़े मुकाबले में थे। सिंधिया को 200 में 4.13 लाख वोट मिले थे।
ग्वालियरः भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर मुरैना सीट छोड़कर ग्वालियर आ गए हैं और कांग्रेस के अशोक सिंह उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है। यशोधराराजे सिंधिया इस सीट से 2.52 लाख वोटों के साथ जीती थी। जहां नरेंद्र सिंह तोमर दूसरी सीट छोड़कर ग्वालियर आए हैं, वहीं अशोक सिंह स्थानीय हैं। उनका गांव-गांव में संपर्क है। तोमर सत्ताधारी दल के प्रदेशाध्यक्ष हैं।
मुरैनाः नरेंद्रसिंह तोमर तो ग्वालियर की ओर पलायन कर गए। उनकी जगह अनूप मिश्रा आ गए हैं। बसपा के उम्मीदवार ने मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है। कांग्रेस के डॉ. गोविंद सिंह मैदान में हैं। तोमर ने 2009 में तीन लाख वोट हासिल करके जीती। जातियों के गणित से चलने वाली इस सीट पर बसपा के वृंदावन सिंह सिकरवार ने अनूप मिश्रा को मुकाबले में ला दिया।
भिंड, राजगढ़, भोपाल सीट
भिंडः कांग्रेस को यहां अब तक के 13 लोकसभा चुनावों में से केवल 3 में ही सफलता मिली है। कांग्रेस से आए भागीरथ प्रसाद भाजपा के उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस की डबरा से विधायक इमरती देवी से है। केवल एक महीने में इमरती देवी ने बहू और बेटी बन-बनकर खासी लोकप्रियता अर्जित कर ली है। मजदूरी से जीवन आरंभ करने वाली इमरती देवी ने मंझे हुए नौकरशाह भागीरथ प्रसाद के साथ कांग्रेस को मुकाबले में ला दिया है। पिछली बार अशोक अर्गल ने 2.27 लाख वोट हासिल किए थे।
राजगढ़ः दिग्विजय सिंह के खास समर्थक नारायणसिंह अमलाबे का मुकाबला आरएसएस के कार्यकर्ता रोडमल नागर से है। अमलाबे जहां सोंधिया हैं, वहीं रोडमल धाकड़ हैं। मोदी के पक्ष में बह रही हवा का लाभ रोडमल को मिल रहा है। दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मणसिंह के विदिशा से खड़े होने के कारण अमलाबे को पूरा समर्थन नहीं मिल पा रहा है। 2009 में अमलाबे ने 3.19 लाख वोट हासिल किए थे।
भोपालः कांग्रेस ने पीसी शर्मा को मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने कार्यकर्ता आलोक संजर को टिकट दिया है। 2009 में कैलाश जोशी 3.35 लाख वोट लेकर जीते थे। परंपरा का गणित भाजपा के पक्ष में रहता है लेकिन इस बार पीसी शर्मा भी एक मजबूत उम्मीदवार हैं। वह कड़ा संघर्ष दे रहे हैं। मुकाबला हमेशा की तरह एकतरफा नहीं रह गया है।
सागरः कांग्रेस के गोविंदसिंह राजपूत का मुकाबला लक्ष्मीनारायण यादव से है। नौ पार्टियां बदल चुके लक्ष्मीनारायण यादव को टिकट मिला तो भाजपा में कई नेताओं की भौंहें टेढ़ी हो गई थीं। पिछली बार से सांसद भूपेंद्र सिंह जिन्होंने 3.24 लाख मत हासिल किए थे, अब शिवराज मंत्रिमंडल में परिवहन मंत्री हैं। वह लक्ष्मीनारायण यादव का प्रचार जरूर कर रहे हैं, लेकिन वह उनके खिलाफ रहे हैं। भाजपा ने सीट पांच बार लगातार जीती है। आठ में से सात विधानसभा सीटें भाजपा के पास हैं। 2009 में भूपेंद्र सिंह ने 3.24 लाख वोट हासिल किए थे।
टीकमगढ़ः कांग्रेस और भाजपा का सीधा मुकाबला है। 2009 में परिसीमन के बाद आरक्षित सीट से वीरेंद्र खटीक ने 2 लाख वोटों के साथ जीत हासिल की थी। अब उनका मुकाबला कांग्रेस के कमलेश वर्मा से है। वह छतरपुर के मूलनिवासी जरूर हैं, लेकिन आजकल दिल्ली में रहते है। सपा ने चरखारी से पूर्व विधायक अंबेश कुमारी को मैदान में उतार दिया है। आठ में से छह विधानसभाएं भाजपा के पास हैं। जातीय समीकरण के हिसाब से मुकाबला टक्कर का है।
खजुराहोः भाजपा ने पूर्व मंत्री नागेंद्र सिंह को खजुराहो से मैदान में उतारा है। कांग्रेस के दो विधायकों संजय पाठक और नारायण त्रिपाठी ने पाला बदलकर नागेंद्र सिंह की स्थिति मजबूत कर दी है। जितेंद्र सिंह बुंदेला ने 2009 में 2.29 लाख वोट हासिल किए थे।
दमोहः भाजपा, कांग्रेस, बसपा और आप के सभी उम्मीदवार पढ़े-लिखे हैं। प्रहलाद पटेल ने उमा भारती की भाजश छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के बाद लंबी यात्रा तय कर ली है। 1986 में राजनीतिक जीवन आरंभ करने वाले प्रहलाद पटेल वाजपेयी मंत्रिमंडल में मंत्री रहे हैं। दमोह उनके लिए नई जगह है। कांग्रेस के चौधरी महेंद्र प्रताप सिंह का राजनीतिक जीवन भी काफी लंबा रहा है। आम आदमी पार्टी ने आरटीआई कार्यकर्ता संतोष भारती को टिकट दिया है। शिवराज भैया को 2009 में 3 लाख वोट मिले थे।