वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिज़र्व
वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य (नौरादेही) में करीब छह माह से लापता बाघिन अपने चार शावकों के साथ सुरक्षित और स्वस्थ पाई गई है। पेंच बाघ अभयारण्य से बचाकर यहां लाई गई यह बाघिन कैमरे के जाल (ट्रैप कैमरों) में अपने सभी बच्चों के साथ दिखाई दी है। लंबे समय तक रेडियो कॉलर से लोकेशन न मिलने और संपर्क टूटने के बाद वन विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई थी। अब सभी शावकों के बड़े और स्वस्थ दिखने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
कुएं से रेस्क्यू के बाद मिला नया ठिकाना
इस बाघिन को 4 फरवरी, 2025 को सिवनी जिले के हरदोली गांव में बिना मुंडेर के एक कुएं से सुरक्षित बाहर निकाला गया था। जंगली सूअर का पीछा करते समय बाघिन दुर्घटनावश कुएं में गिर गई थी। उस समय पेंच बाघ अभयारण्य के अधिकारियों ने क्रेन और चारपाई की मदद से कड़ी मशक्कत करके उसकी जान बचाई थी। इस रेस्क्यू के बाद बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाकर निगरानी के लिए नौरादेही क्षेत्र में छोड़ा गया था। नए जंगल के माहौल में ढलने के बाद बाघिन का मेल एक नर बाघ से हुआ। इसके बाद अप्रैल, 2026 में उसने चार शावकों को जन्म दिया।
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सिग्नल बंद होने से गहराया था संकट
शावकों के जन्म के शुरुआती दिनों में बाघिन एक-दो बार अपने बच्चों के साथ दिखाई दी थी। इसके बाद अचानक उसकी गतिविधियों की जानकारी मिलना बंद हो गई। रेडियो कॉलर से भी लोकेशन न मिलने के कारण वन विभाग के सामने उसकी तलाश करना बड़ी चुनौती बन गया था। लंबे समय तक कोई सुराग न मिलने से बाघिन और शावकों के सुरक्षित रहने पर भी आशंकाएं जताई जाने लगी थीं। कुछ लोगों ने उनके लापता होने को लेकर अफवाहें भी फैला दी थीं।
कैमरे में दर्ज हुई पूरे परिवार की तस्वीर
अब जंगल में लगे ट्रैप कैमरों में पूरे परिवार की मौजूदगी दर्ज होने से राहत मिली है। तस्वीरों में बाघिन के साथ उसके चारों शावक स्वस्थ और आकार में बड़े नजर आ रहे हैं। वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य के उप निदेशक रजनीश सिंह ने बताया कि घने वन क्षेत्र में कभी-कभी रेडियो कॉलर का सिग्नल नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि बाघिन के गायब होने को लेकर उड़ रही अफवाहें पूरी तरह गलत थीं और अब सभी चार शावकों के साथ बाघिन पूरी तरह सुरक्षित है। कुएं से निकाले जाने से लेकर चार बच्चों को पालने तक बाघिन का यह सफर वन्यजीव संरक्षण और जीवटता की नई मिसाल है।