इन दिनों रेत के वैध एवं अवैध कारोबार को लेकर उमरिया जिला खासा सुर्खियां बटोर रहा है। रेत को लेकर किसी महाकाल कंपनी के कारनामों की अखबारों में सुर्खियां हो या फिर दूरदराज के ग्रामों में अवैध रूप से फल-फूल रहे रेत के कारोबार का मामला हो। इन सब बातों की जन चर्चा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जोरों पर है।
ऐसा ही एक मामला उमरिया जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कछारी के ग्राम कर्री का प्रकाश में आया है। एक समय था जब ताला मार्ग पर स्थित डेंगरहा नाला में रेत का अवैध कारोबार करने वाले लोगों का आधिपत्य हुआ करता था। ठीक उसी तरह इन दिनों ग्राम कर्री के घोरछत नाले में रेत माफियाओं का एक छत्र राज कायम है।
ग्रामीणों की माने तो वहां यह हाल है कि अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर रात दिन धमाचौकड़ी मचाए हुए हैं। रेत माफिया नाले से भारी मात्रा में रेत का खनन कर सारे नियम कायदों को ताक में रखकर खनिज संपदा से भरे नाले का सीना छलनी करने में आमादा हैं तो दूसरी ओर तमाम दावों की पोल खोलते हुए शासन-प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं। वहीं खनिज, राजस्व एवं वन विभाग को खुलेआम चुनौती भी दे रहे हैं।
बताते चलें कि कर्री ग्राम के इस नाले से खुलेआम अवैध रूप से रेत का दोहन हो रहा है और खनिज विभाग को जानकारी नहीं है या फिर विभाग कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। यह बात आम लोगों के गले नहीं उतर रही है।
किसके शह पर फल-फूल रहा यह धंधा
यह कहने में अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जिस प्रकार से ग्राम पंचायत कछारी के इलाके में अवैध रेत का कारोबार फल फूल रहा है। यह बिना किसी के शह के संभव नहीं है। शासन की संपत्ति को लूटने वाले अवैध रेत के कारोबार पर न खनिज विभाग, वन विभाग और न ही राजस्व विभाग लगाम लगा पा रहा है। रेत के अवैध कारोबार पर लगाम न लगा पाने की इन विभागों की मजबूरी अपने आप में कई सवालों को जन्म देती है। अवैध रेत के धंधे पर प्रशासन कब नकेल कसता है, यह देखने की बात होगी।