उमरिया जिले के बांधवगढ़ में बीते दिनों हुई 10 जंगली हाथियों की मौत के मामले में अब एनजीटी ने अपनी रिपोर्ट साझा की है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि हाथियों की मौत फंगस लगी कोदो की फसल खाने से हुई है। एनजीटी ने यह भी खुलासा किया है कि 1933 में तमिलनाडु में भी इसी तरह मोटे अनाज खाने से 14 हाथियों की मौत हुई थी। एनजीटी की इस रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है। मामले को लेकर बांधवगढ़ प्रबंधन ने मीडिया के सामने एनजीटी की रिपोर्ट पेश कर स्थिति स्पष्ट की है।
यह मामला विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का है, जहां तीन महीने पहले छत्तीसगढ़ से होकर आए जंगली हाथियों ने किसानों की कोदो की फसल खाई थी। फसल में फंगस लगी होने के कारण हाथी फूड पॉयजनिंग का शिकार हो गए, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद वन्य प्राणी विशेषज्ञों ने इस पर रिसर्च कर अपनी रिपोर्ट भारत सरकार और एनजीटी को सौंपी। एनजीटी ने इसे स्वीकार करते हुए बताया कि कोदो की फसल में मौजूद फंगस के कारण मायकोटॉक्सिन उत्पन्न हुआ, जिसने हाथियों की जान ले ली।
एनजीटी की ऐतिहासिक संदर्भ वाली रिपोर्ट
एनजीटी ने अपनी रिपोर्ट में वर्ष 1933 का उल्लेख किया है, जब तमिलनाडु में मोटे अनाज खाने से 14 हाथियों की मौत हुई थी। यह रिपोर्ट बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के जर्नल में प्रकाशित हुई थी। एनजीटी ने इसे संज्ञान में लेते हुए माना कि बांधवगढ़ में हुई मौतें किसी बाहरी हस्तक्षेप, रसायन, या मानव गतिविधि के कारण नहीं हुईं।
एनजीटी के निर्देश और भविष्य की योजनाएं
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पी.के. वर्मा ने बताया कि एनजीटी ने इस घटना को लेकर 10 जनवरी को फैसला सुनाया। फैसले में पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ, वाइल्डलाइफ अथॉरिटी ऑफ इंडिया, कृषि कॉलेज, डब्ल्यूएआई, और कलेक्टर को पार्टी बनाया गया था। एनजीटी ने सुझाव दिया है कि किसानों के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
किसानों को करेंगे जागरूक
डिप्टी डायरेक्टर वर्मा ने बताया कि किसानों को जागरूक करने के लिए समिति गठित की जाएगी। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर कलेक्टर और कृषि विभाग के साथ मिलकर कार्यक्रम चलाए जाएंगे। हाथियों की निगरानी पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। वन विभाग की पैदल गश्त टीमें उनके मूवमेंट पर नजर रखती हैं, और सूचना देने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप और वायरलेस संचार का उपयोग किया जा रहा है।
यह हर बार नहीं होता, एहतियाती कदम उठाएंगे
फसल में फंगस बनने का मुख्य कारण बताया गया है कि जब फसल पकने के बाद उस पर पानी गिरता है, तो ऐसी परिस्थितियां निर्मित होती हैं। हालांकि यह हर बार नहीं होता। डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने होंगे।