Umaria: कुछ गांव की गौशालाओं में महिलाओं ने गोबर की दीये बनाने शुरू किए हैं। सिर्फ दीये ही नहीं गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी गोबर से तैयार किये जा रहे हैं।
उमरिया जिले के चंदिया पाली में मिट्टी और गोबर की दीये भारी संख्या में बनाए जाते हैं, लेकिन इस बार कुछ गांव की गौशालाओं में महिलाओं ने गोबर की दीये बनाने शुरू किए हैं। सिर्फ दीये ही नहीं गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी गोबर से तैयार किये जा रहे हैं।
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दीये का निर्माण गांव के लोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी खासी आय भी हासिल होगी। गोबर से बनी दीये पूजा के लिए पवित्र भी माने जाते हैं, साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है गो पालन समूह को कुमुर्द एवं कौड़िया की समूहों ने गोबर की दीये समूहा शुरू भी कर दिया है।।
गोबर का पूरा उपयोग
इस दीपोत्सव के लिये नंद गौशाला कुमुर्दु और शिव गौशाला कौड़िया 22 में गोबर की दीपक बनाए जा रहे हैं, ताकि संस्कृति के अनुसार प्रत्येक सराहनी के घरों में लक्ष्मी के गोबर रूप का प्रयोग हो सके और आध्यात्मिक लाभ मिल सके।
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दूसरी तरफ गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का यह प्रयोग प्रदान किया जा रहा है। एक जानकारी के अनुसार अभी तक इन स्थानों पर भी हजार से ज्यादा दिए बनाए जा चुके हैं और लाख दीये तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। दीये बनाने के साथ ही उनकी बिक्री के लिए भी व्यवस्थाएं बनाई जा रही है।