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Umaria News: 12.91 करोड़ के सामुदायिक शौचालय बने शोपीस, कहीं टंकी-नल चोरी तो कहीं भवन पर कर लिया किसी ने कब्जा

Wed, 13 May 2026 04:01 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया

सार

उमरिया जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए 369 सामुदायिक शौचालय बदहाल स्थिति में हैं। कई जगह टंकियां, नल और रैलिंग चोरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ भवन बंद पड़े हैं या निजी उपयोग में लिए जा रहे हैं। रखरखाव की कमी से करीब 13 करोड़ की योजना सवालों के घेरे में आ गई है।
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12 करोड़ 91 लाख के सामुदायिक शौचालय बने शोपीस, कहीं टंकी-नल चोरी तो कहीं कब्जे में भवन
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विस्तार
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उमरिया जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 2021-22 के तहत बनाए गए सामुदायिक शौचालय अब सवालों के घेरे में हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए ये शौचालय कई गांवों में उपयोग के बजाय सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। कहीं इनकी टंकियां और नल चोरी हो चुके हैं, तो कहीं रैलिंग तक गायब हो गई है। कई स्थानों पर भवनों पर सरपंच और सचिव के कब्जे की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

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जिले में सामुदायिक स्वच्छता को बढ़ावा देने और खुले में शौच की समस्या खत्म करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी अधिकांश शौचालयों की हालत बदहाल नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई भवनों के दरवाजों पर ताले लटक रहे हैं, कुछ जगहों पर पानी की व्यवस्था ही नहीं है, जबकि कई शौचालयों के भीतर लगे सामान चोरी हो चुके हैं।

जनपद पंचायतों से मिली जानकारी के अनुसार पाली जनपद पंचायत क्षेत्र में 77, करकेली जनपद पंचायत क्षेत्र में 160 और मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में 132 सामुदायिक शौचालय बनाए गए। इस प्रकार जिले में कुल 369 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया। यदि एक सामुदायिक शौचालय की लागत लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये मानी जाए, तो 369 शौचालयों के निर्माण पर करीब 12 करोड़ 91 लाख 50 हजार रुपये खर्च किए गए। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद अधिकांश स्थानों पर इन शौचालयों का संचालन और रखरखाव सवालों के घेरे में है।
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ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के शुरुआती दिनों में कुछ शौचालयों का उपयोग हुआ, लेकिन बाद में देखरेख के अभाव में वे बंद होते चले गए। कई गांवों में पानी की टंकियां चोरी हो गईं, पाइपलाइन टूट गई, नल गायब हो गए और रैलिंग तक उखाड़ ली गई। कुछ जगहों पर भवनों का उपयोग गोदाम या निजी कार्यों के लिए किए जाने की भी चर्चा है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी। पंचायत स्तर पर निगरानी की कमी और नियमित देखरेख नहीं होने से सरकारी धन से तैयार सुविधाएं धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं।

गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि इन शौचालयों का सही तरीके से संचालन होता तो ग्रामीणों को काफी सुविधा मिलती। विशेष रूप से बाजार क्षेत्र, सार्वजनिक आयोजन और बाहरी लोगों के उपयोग के लिए यह योजना काफी उपयोगी साबित हो सकती थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में अधिकांश भवन उपयोग से बाहर हैं।
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इस मामले में जब उमरिया कलेक्टर राखी सहाय से चर्चा की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि कई जगहों पर टंकियां और नल चोरी होने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ से चर्चा की गई है और ऐसी व्यवस्था बनाने की योजना तैयार की जा रही है जिससे शौचालय चालू भी रहें और चोरी जैसी घटनाएं भी न हों। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर योजना बनाने की बात कही जा रही है।


उपयोगविहीन सामुदायिक शौचालय

 

उपयोगविहीन सामुदायिक शौचालय

 

उपयोगविहीन सामुदायिक शौचालय

 

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