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Ujjain: इस वर्ष सर्वार्थसिद्धि योग के विशेष संयोग में मनाई जाएगी गुप्त नवरात्रि, जानिए क्या है विशेष मुहूर्त?

Mon, 12 Jan 2026 08:48 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

Ujjain: नए साल की पहली गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होगी।  माघ मास में नौ दिनों तक मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि का आरंभ सर्वार्थसिद्धि योग के महासंयोग में होगा। नवरात्रि का समापन 27 जनवरी को होगा।
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माघ गुप्त नवरात्रि - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नए साल की पहली गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होगी। इस अवसर पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 8.34 से 9.59 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.13 से 12.58 बजे तक रहेगा।
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महासंयोग में होगी गुप्त नवरात्रि की शुरुआत
गुमानदेव हनुमान पीठ के पंडित चंदन श्याम नारायण व्यास ने बताया कि माघ मास में नौ दिनों तक मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि का आरंभ सर्वार्थसिद्धि योग के महासंयोग में होगा। नवरात्रि का समापन 27 जनवरी को होगा। इस दौरान साधक तंत्र, मंत्र और यंत्र की सिद्धि के लिए गुप्त साधना करेंगे।

साल में कुल 4 बार मनाई जाती हैं नवरात्रियां
उन्होंने बताया कि वर्ष में कुल चार नवरात्रियां मनाई जाती हैं, जिनमें दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रियां गुप्त, जबकि चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रियां प्रकट नवरात्रि कहलाती हैं। माघ मास की गुप्त नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक रहती है, जिसमें कई विशेष पर्व भी आते हैं। इनमें गौरी तृतीया, वरद तिल कुंद चतुर्थी, बसंत पंचमी, नर्मदा जयंती, आरोग्य सप्तमी और भीष्म अष्टमी प्रमुख हैं।
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कब होगा  गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, प्रतिपदा तिथि को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि में चंद्रमा की उपस्थिति में गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा। मध्याह्न काल में अभिजीत मुहूर्त के दौरान सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग रहेगा। इस योग को सभी शुभ और मांगलिक कार्यों को सफल बनाने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में की गई साधना और आराधना शीघ्र फलदायी होती है।

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गुप्त नवरात्रि में होती है दस महाविद्याओं की विशेष पूजा 
प्रकट नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की विशेष पूजा होती है। प्रकट नवरात्रि सांसारिक सुखों और इच्छाओं की पूर्ति के लिए मानी जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि मनोकामना सिद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए की जाती है। प्रकट नवरात्रि वैष्णव परंपरा से और गुप्त नवरात्रि शैव एवं शाक्त परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। प्रकट नवरात्रि की देवी मां पार्वती और गुप्त नवरात्रि की अधिष्ठात्री देवी मां काली मानी जाती हैं। गुप्त नवरात्रि का समापन दसवें दिन दशमी तिथि को होता है, जिसे नवरात्रि पारणा के रूप में मनाया जाता है।
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