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Ujjain News: उज्जैन में कई समाज आए साथ, प्री-वेडिंग और बेबी शूट के खिलाफ चलाएंगे मुहिम

सार

उज्जैन में कई समाज एक साथ आए हैं और उन्होंने प्री-वेडिंग और बेबी शूट का विरोध किया है। उन्होंने जनता को जागरुक करने का फैसला किया है। वहीं, एक फोटोग्राफर ने तो विजिटिंग कार्ड पर ही लिख दिया कि प्री-वेडिंग शूट हमारी संस्कृति के खिलाफ है। हम नहीं करते।   
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प्री वेडिंग (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्री-वेडिंग और बेबी शूट का उज्जैन में विरोध बढ़ रहा है। कई समाज अब इसके खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। माहेश्वरी, अग्रवाल, जैन, मांझी और ब्राह्मण समाज ने इसका विरोध किया है। इन समाजों के प्रमुखों का कहना है कि यह एक प्रकार की कुरीति है। इसे खत्म करने की पहल आज के समय की आवश्यकता है। प्री-वेडिंग के बाद समाज में फोटो सार्वजनिक होने से गलत संदेश जाता है। यह परंपरा और संस्कृति के खिलाफ तो है ही, फिजूल खर्ची भी है। माहेश्वरी, अग्रवाल, जैन और ब्राह्मण समाज उज्जैन के प्रमुख लोगों का कहना है कि आने वाली समाज की बैठकों में इस पर बात की जाएगी। समाजजनों से इस कुरीति का बहिष्कार करने की अपील भी करेंगे।

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समाज प्रमुख बोले - यह परंपरा और संस्कृति के खिलाफ
अग्रवाल समाज के भगवानदास एरन ने कहा कि प्री-वेडिंग शूट बेहद खर्चीला तो ही है लेकिन यह हमारी परंपरा व संस्कृति के भी खिलाफ है। आने वाले दिनों में समाज की बैठक में इसके बहिष्कार की बात करेंगे। वहीं, मांझी समाज के प्रदेश अध्यक्ष राकेश वर्मा ने कहा कि प्री-वेडिंग शूट कुरीति के रूप में समाज को नुकसान पहुंचा रहा है। भविष्य में इसके दुष्परिणाम न भुगतने पड़े इसलिए माहेश्वरी समाज ने सबसे पहले इसके विरोध का निर्णय लिया। जैन समाज के अशोक जैन चायवाला ने कहा कि लोग प्री-वेडिंग शूट न करवाएँ। इस पर पूरे समाज को जागरुक कर रहे हैं।  ब्राह्मण समाज के समाजसेवी सुरेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि कुछ लोग इवेंट मैनेजमेंट के नाम पर प्री-वेडिंग शूट के लिए युवाओं को प्रेरित करते हैं। यह सामाजिक परंपरा के विपरीत है। इसका विरोध होना चाहिए।

फोटोग्राफर ने कहा- हम नहीं करेंगे प्री-वेडिंग शूट
उज्जैन की एक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के प्रमुख अनिकेत सैन का विजिटिंग कार्ड वायरल हो रहा है। सेन ने कार्ड में प्रमुख रूप से यह बात प्रकाशित की है कि प्री-वेडिंग और बेबी शूट हमारी संस्कृति के खिलाफ है। इसके लिए हमसे संपर्क ना करें। सेन का कहना है कि प्री-वेडिंग और बेबी शूट पाश्चात्य संस्कृति की एक अंधी दौड़ है। इसे करवाने के पीछे युवाओं का तर्क है कि यह हमारे जीवन की ऐसी यादें हैं जिन्हें हम संजोकर रखना चाहते हैं। सेन का कहना है कि जीवन की खुशनुमा यादों को संजोने के लिए हमें सही समय का इंतजार भी करना चाहिए। प्री-वेडिंग शूट में कई फोटो और पोज ऐसे होते हैं, जिन्हें जब शादी के समय एलईडी स्क्रीन पर दिखाया जाता है तो वहां शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती है। बेबी शूट भी कुछ इसी तरह से होता है। इस प्रकार के फोटो शूट करवाना हमारी संस्कृति नहीं है। 

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