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Ujjain: महाकाल लोक पहुंची सप्तऋषि की प्रतिमाएं, अब उद्घाटन का इंतजार, तेज आंधी तूफान से हो गई थीं खंडित

Wed, 16 Aug 2023 09:17 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

Ujjain News: आंधी तूफान में महाकाल लोक में लगी सप्तऋषि की प्रतिमाएं खंडित हो गई थी, जिसके बाद अब महाकाल लोक में नई प्रतिमाएं बनकर आ गई हैं, जिनका लोकर्पण जल्द ही सीएम शिवराज कर सकते हैं।
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सप्तऋषि की नई प्रतिमाएं पहुंची उज्जैन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाकाल लोक में स्थापित सप्तऋषियों की खंडित मूर्तियां बनकर उज्जैन आ गई हैं। इन मूर्तियों को दोबारा स्थापित कर दिया गया है। लेकिन इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जल्द ही इनका लोकार्पण कर सकते हैं। 28 मई 2023 को शहर में आए आंधी-तूफान के कारण ये मूर्तियां जमीन पर गिरकर टूट गई थी। इसके बाद प्रदेश में इन मूर्तियों को लेकर जबरदस्त राजनीति भी हुई। इन मूर्तियों के अभाव में महाकाल लोक की खूबसूरती कम हो गई थी, लेकिन अब जल्द ही श्रद्धालु इन मूर्तियों को महाकाल लोक में देख सकेंगे। 
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बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 11 अक्टूबर 2022 को महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। उसके बाद महाकाल लोक आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था। तब से महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बता दें, महाकाल लोक की मूर्तियां गुजरात की कंपनी ने बनाई हैं। मूर्तियों के रखरखाव की जवाबदारी पांच साल तक कंपनी की ही है। महाकाल लोक 430 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। यहां लगी अलग-अलग मूर्तियों की कीमत 45 करोड़ रुपये है। यह मूर्तियां पांच साल के लिए डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में हैं। इनकी उम्र 10 साल है। इन मूर्तियों के खंडित होने से शासन-प्रशासन को कोई नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि जिस ठेकेदार ने काम किया है उसे ही पांच साल के लिए मूर्तियों का रखरखाव करना है। 

पुरानी मूर्तियों से ज्यादा मजबूत हैं नई मूर्तियां
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने मूर्तियां बनाने वाली एजेंसी के खर्च पर ही नई प्रतिमाएं तैयार कराई हैं। 20 अगस्त के आसपास इनका लोकार्पण होने की संभावना है। मुख्यमंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि नई प्रतिमाएं मजबूत हैं। इनका बेस भी मजबूत रहेगा। स्टैंड पर इन्हें लोहे की रॉड और सीमेंट-कंक्रीट मटेरियल से स्थापित किया गया है। मूर्तियों के जॉइंट भी मजबूती से जोड़े गए हैं।
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