साहब मेरे बेटे ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्मघाती कदम उठा लिया था। इस मामले में डेढ़ साल पहले मेरी पुत्रवधू के कमरे से बेटे द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी मिला था। उसके बाद हम लगातार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए ज्ञापन दे रहे हैं, लेकिन इस मामले मे जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हमने हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगाई थी। जहां से माननीय हाईकोर्ट ने आदेशित किया था कि इस पूरे मामले में 30 दिनों के भीतर कार्रवाई की जाए। लेकिन माननीय हाईकोर्ट के आदेश को जारी हुए लगभग 90 दिन हो चुके हैं और अब तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर जांच की शुरूआत भी नहीं हो पाई है। एसपी साहब आप हाईकोर्ट के आदेश का पालन करवाओ और मेरे मृतक बेटे को न्याय दिलाओ, बस मेरी आपसे यही निवेदन है।
कुछ ऐसी ही फरियाद लेकर अब्दालपुरा में रहने वाला रमेशचंद्र रामचंदानी पिता जस्सुमल रामचंदानी मंगलवार सुबह एसपी की जनसुनवाई में पहुंचे थे। यहां उन्होंने एसपी सचिन शर्मा को बताया कि मेरे बेटे स्वर्गीय गोविन्द रामचंदानी ने उसकी पत्नी और ससुराल वालों के द्वारा दी गई प्रताड़ना और आत्महत्या करने के लिए उकसाने के कारण 22 सितंबर 2020 को घर पर ही आत्महत्या कर ली थी।
उसके करीब एक साल बाद मेरी पुत्रवधु के कमरे से मेरे पुत्र गोविंद का हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला, जिसके मिलने के बाद मेरे द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पिछले डेढ़ साल से मुख्यमंत्री कार्यालय भोपाल जाकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर आईजी, एसपी, सीएसपी और थाना प्रभारी को शिकायत की गई। लेकिन इसके बावजूद भी जब मुझे कोई न्याय नहीं मिल पाया तो मेरे द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट में एक वाद दायर किया था, जिसमें माननीय न्यायाधीश ने 21 फरवरी 2023 को एक आदेश जारी किया, जिसमें 30 दिनों के दौरान मेरी पुत्रवधू और उसके परिवार के लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन इस मामले में जीवाजीगंज थाने के सीएसपी और थाना प्रभारी द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को 90 दिन गुजरने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जो कि हाईकोर्ट के आदेशों की सरासर अवहेलना है।
सुसाइड नोट मिला, तभी लगाया आरोप...
इस बारे में रमेशचंद्र रामचंदानी ने अमर उजाला को बताया कि जब तक सुसाइड नोट नहीं मिला था, तब तक हम इस पूरे मामले को आत्महत्या ही मान रहे थे। लेकिन सुसाइड नोट में मेरे बेटे ने साफ-साफ लिखा था कि मेरी मौत के जिम्मेदार मेरे ससुराल के लोग हैं, जिसके बाद से लगातार थाने, सीएसपी, एसपी और आईजी कार्यालय पर चक्कर लगाते रहे। मैंने न्याय के लिए मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई, लेकिन मुझे अब तक न्याय नहीं मिल पाया। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और मेरे मृतक बेटे को न्याय मिले।
खुदकुशी के लिए उकसाने का केस हो दर्ज...
रमेशचंद्र रामचंदानी ने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, पुलिस को पूरे मामले की जांच करना चाहिए और इसके बाद वह लोग जो इस पूरे मामले के दोषी हैं। पमनानी परिवार के उन सभी लोगों के खिलाफ मेरे बेटे को खुदकुशी के लिए उकसाने और धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज होना चाहिए।