शास्त्री नगर मैदान में 32 वर्षों से जय सिंह दरबार सेवा समिति की ओर से आधुनिक रूप से रावण के पुतले का निर्माण कर उसका दहन किया जाता रहा है। इस वर्ष भी यह आयोजन अति भव्य होने वाला था, जिसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल व प्रदेश सरकार के कई मंत्री शामिल होने वाले थे।
दोपहर तक इस आयोजन की तैयारी धूमधाम से चल रही थी, लेकिन शाम पांच बजे अचानक हुई बारिश के बाद कार्यक्रम के आयोजक और वरिष्ठ भाजपा नेता जयसिंह दरबार ने शास्त्री नगर मैदान में हो रही अव्यवस्थाओं को लेकर एक निर्णय लिया, जिसके तहत शाम 6 बजे ही रावण के पुतले का दहन कर दिया गया।
जयसिंह दरबार सेवा समिति के विजय सिंह दरबार ने जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रतिवर्ष ही बासी दशहरे पर शास्त्री नगर मैदान में भव्य रावण के पुतले का निर्माण किया जाता है और हजारों शहरवासियों की मौजूदगी में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इस वर्ष भी जयसिंह दरबार सेवा समिति द्वारा काफी मेहनत कर भव्य रावण के पुतले का निर्माण किया गया था जो कि भगवान श्री राम का तीर लगते ही तीन भागों में विभक्त हो जाता। लेकिन शहर में लगातार हो रही बारिश के कारण शास्त्री नगर मैदान में ऐसी व्यवस्थाएं नहीं जुटाई जा रही थी। जिससे कि रावण दहन देखने वाले हजारों श्रद्धालु आसानी से रावण दहन देख सके। यही कारण था कि सेवा समिति ने एक निर्णय लिया जिसके तहत कोई भी अव्यवस्था रावण दहन के दौरान ना हो इसीलिए रावण के पुतले का दहन रात 9 बजे की बजाय शाम 6 बजे ही कर दिया गया।
हर वर्ष अलग तरीके से बनाते हैं रावण
शास्त्री नगर मैदान में भले ही प्रतिवर्ष बासी दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है लेकिन यह रावण शहर में बनाए जाने वाले अन्य रावण के पुतलों से कुछ अलग होता है। कभी रावण के पुतले की 10 मुंडिया गोल-गोल घूमती है तो कभी भगवान श्री राम का तीर लगते ही रावण की गर्दन धड़ से अलग होकर आकाश में दूसरे स्थान पर दिखने लगती है। इस वर्ष भी जयसिंह दरबार सेवा समिति के द्वारा रावण के पुतले को आकर्षक रूप से बनाया गया था। जिसमें भगवान श्री राम का तीर लगते ही रावण की गर्दन पेट और पैर अलग-अलग हो जाते।
इसीलिए जल्द करना पड़ा रावण का दहन
जयसिंह दरबार सेवा समिति तो चाहती थी कि प्रतिवर्ष की तरह ही इस वर्ष भी रावण का दहन निर्धारित समय पर ही हो लेकिन काफी मशक्कत करने के बावजूद भी मैदान में व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही थी लगातार बारिश होने के कारण जहां मैदान में चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ फैल गया था जबकि यहां विद्युत सज्जा के लिए लगाए गए तार भी खुले हुए थे। अव्यवस्था के कारण कोई जनहानि या कोई दुर्घटना ना हो इसीलिए शाम 6 बजे ही रावण के पुतले का दहन कर दिया गया।