उज्जैन शहर के लिए इस बार की गर्मी राहत लेकर आई। आठ साल बाद शहर को प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति मिली है। वजह बना नर्मदा का पानी जो सीधे गऊघाट फिल्टर प्लांट तक पहुंचा। वरना हर साल PHE गर्मी में एक दिन छोड़कर पानी देता था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जल निगम, नगर निगम और PHE की टीम ने मिलकर ये व्यवस्था बनाई और शहर की दशकों पुरानी परेशानी दूर कर दी।
उज्जैन शहरवासियों ने इस बार गर्मी में पानी के लिए लाइन नहीं लगाई, न टैंकरों का इंतजार किया। 2017 के बाद पहली बार पूरा सीजन नियमित जलप्रदाय होता रहा। इसकी बड़ी वजह बनी जल निगम की नई रणनीति। अब नर्मदा का पानी सिर्फ गंभीर डैम तक ही नहीं रोका गया, बल्कि सीधे गऊघाट फिल्टर प्लांट तक पहुंचाया गया। इससे गंभीर डैम पर निर्भरता घटी और उसका जल भंडार भी बचा रहा।
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27 जून को गंभीर डैम में 424 एमसीएफटी पानी दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी दिन सिर्फ 281 एमसीएफटी था। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा और जल निगम के महाप्रबंधक घनश्याम उपाध्याय की टीम ने पूरी गर्मी मॉनिटरिंग की। PHE के कार्यपालन यंत्री वैभव भावसार और सहायक यंत्री शिवम दुबे की मौजूदगी से मैदानी अमले को मजबूती मिली।
नगर निगम फिलहाल रोज करीब 7 एमसीएफटी नर्मदा का पानी ले रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश पूरी तरह सक्रिय होने तक नर्मदा से पानी लेना जारी रहेगा, ताकि सप्लाई न टूटे। नई व्यवस्था से कई इलाकों में प्रेशर की समस्या भी खत्म हो गई।
आठ साल से हर गर्मी में एक दिन छोड़कर पानी मिलने से लोग परेशान थे। गंभीर डैम का जलस्तर गिरते ही संकट गहरा जाता था। लेकिन इस बार CM डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर बनी रणनीति ने तस्वीर बदल दी। लोगों को राहत मिली और गंभीर डैम का पानी भी अगली गर्मी के लिए सुरक्षित हो गया।
गंभीर डेम में अब भी है पानी
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