उज्जैन में 50,000 की उधारी वसूलने के लिए तीन लोगों ने एक युवक का अपहरण कर लिया। आरोपियों ने पहले एक कार को रोका, फिर उसमें बैठे युवक को उतारा और डरा-धमकाकर एक अन्य कार में अपने साथ ले गए। मामले में पुलिस ने तीन के खिलाफ केस दर्ज किया है।
जहां यह घटनाक्रम हुआ वहां पर सीसीटीवी लगे थे, जिससे आरोपियों की जल्द पहचान हो गई। कुछ घंटों में ही पुलिस ने युवक को अपहरणकर्ताओं से मुक्त करवाकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
माधवनगर थाना प्रभारी मनीष लोधा ने बताया कि मंगलवार रात को लगभग आठ बजे सूचना मिली थी कि मुनिनगर तालाब पर एक कार को रोककर कुछ लोगों ने एक युवक का अपहरण कर लिया। मामला अपहरण का था, इसलिए तुरंत हम घटनास्थल पर पहुंचे। वहां लगे सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों को अपहृत युवक मोहित उर्फ तनिष्क निगम उम्र 23 साल निवासी नानाखेड़ा के प्रगतिनगर को उसके पिता संजोग निगम ने पहचान लिया, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अपहरणकर्ताओं के चंगुल से तनिष्क को न सिर्फ छुड़वा लिया। बल्कि तीनों अपहरणकर्ताओं को भी गिरफ्तार कर लिया।
यह है पूरा घटनाक्रम
प्रगति नगर में रहने वाला तनिष्क निगम मंगलवार रात्रि को निजी अस्पताल में भर्ती दादी से मिलने अस्पताल जा रहा था। इस दौरान कार में पिता संजोग निगम भी साथ थे। मुनिनगर मार्ग पर उसे अजय पिता कमल मीणा निवासी काजीपुरा, राजेश पिता मुन्नालाल निवासी इंदौर, जितेंद्र पिता मदनलाल निवासी परदेशीपुरा इंदौर ने अगवा कर लिया। इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। माधवनगर थाना प्रभारी मनीष लोधा ने बताया कि भले ही यह मामला 50,000 रुपये के लेनदेन का था, लेकिन जिस तरीके से युवक का अपहरण किया गया वह सरासर गलत है। इसलिए केस दर्ज किया गया है।
गुंडा लिस्ट में है फरियादी तनिष्क का नाम
नानाखेड़ा टीआई ओपी अहीर ने बताया कि फरियादी तनिष्क का नाम भी गुंडा सूची में शामिल है। उस पर थाने में लगभग 10 अपराध दर्ज हैं। भले ही इस घटनाक्रम में उसका अपहरण हुआ हो, लेकिन वह भी नानाखेड़ा थाना क्षेत्र का बदमाश है।
50,000 रुपये की उधारी का इंदौरी कनेक्शन
बताया जाता है कि तनिष्क को लव जूनवाल निवासी इंदौर ने परदेशीपुरा के जितेंद्र से 50 हजार रुपये उधार दिलाए थे। एक मई को लव की इंदौर में करंट से मौत हो गई। उसकी अंत्येष्टि में शामिल होने तनिष्क इंदौर गया था, यहां जितेंद्र ने उससे रुपये मांगे। बताते हैं कि कहासुनी भी हुई थी। इसके बाद ही उधारी वसूलने के लिए अपहरण किया गया।