उज्जैन की समाजसेविका ममता सांगते ने निर्भया कांड से प्रेरित होकर 1200 बच्चियों को निशुल्क मार्शल आर्ट प्रशिक्षण दिया। वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, सैनिकों की सहायता, आपदा राहत और जरूरतमंद परिवारों की मदद जैसे सेवा कार्यों में लगातार सक्रिय हैं।
धार्मिक नगरी उज्जैन की समाजसेविका ममता सांगते पिछले 30 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। निर्भया कांड के बाद उन्होंने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को अपना मिशन बना लिया। अब तक वे 1200 बच्चियों को निशुल्क मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दे चुकी हैं, वहीं 300 महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए प्रशिक्षित कर चुकी हैं।
ममता सांगते ने बताया कि निर्भया कांड ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था। इसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि बेटियों और महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाया जाए। उनका मानना है कि वर्तमान समय में युवतियों को अपनी सुरक्षा करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाली घटनाएं चिंता का विषय हैं, इसलिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण समय की आवश्यकता बन चुका है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ममता ने सामाजिक न्याय मंत्रालय के सहयोग से स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण भी शुरू किया। इसके माध्यम से सैकड़ों महिलाओं को रोजगार से जोड़कर अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिला।
कोरोना काल के दौरान उन्होंने 51 आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को चिन्हित किया। तब से हर वर्ष दीपावली पर वे इन परिवारों को “शगुन की टोकरी” भेंट करती हैं, ताकि वे भी त्योहार को खुशी और सम्मान के साथ मना सकें। ममता सांगते के उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए उन्हें मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा विजयाराजे सिंधिया सेवा सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।