अंधविश्वास ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। उज्जैन में तंत्र-मंत्र से जुड़ी भ्रांतियों के चलते एक युवक ने तीन बेजुबान सियारों की बेरहमी से हत्या कर दी। जीवाजीगंज पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी मिथुन पिता राजू को गिरफ्तार किया गया है। उसके मोबाइल फोन से सियारों की हत्या के वीडियो भी बरामद हुए हैं।
उज्जैन के वन मंडल अधिकारी (DFO) अनुराग तिवारी ने बताया कि जीवाजीगंज पुलिस ने आरोपी मिथुन को एक अन्य मामले में हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान उसके मोबाइल की जांच की गई, जिसमें तीन सियारों को उनके प्राकृतिक आवास से पकड़कर मारने के वीडियो मिले। वीडियो की पुष्टि होने के बाद वन विभाग की टीम ने कार्रवाई की। पूछताछ में आरोपी ने तीनों सियारों की हत्या करना स्वीकार कर लिया।
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अंधविश्वास बना हत्या की वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी तंत्र-मंत्र से जुड़े अंधविश्वास के प्रभाव में था। उसे भ्रम था कि सियार के अंग तांत्रिक क्रियाओं में उपयोगी होते हैं। इसी अंधविश्वास के कारण उसने वारदात को अंजाम दिया। वन विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि इस मामले में कोई और व्यक्ति शामिल है या नहीं।
घर और ठिकानों पर तलाशी
वन विभाग की टीम आरोपी के घर और अन्य संभावित ठिकानों पर तलाशी ले रही है। टीम वन्यजीवों के अवशेष या अन्य साक्ष्यों की तलाश कर रही है। DFO अनुराग तिवारी ने बताया कि सियार (गोल्डन जैकाल) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव है और इसकी हत्या गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज
आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत की मांग की जाएगी। वन विभाग ने लोगों से तंत्र-मंत्र के नाम पर फैलाई जाने वाली अफवाहों और अंधविश्वासों से दूर रहने तथा वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।
क्या है कानूनी स्थिति?
- गोल्डन जैकाल (सियार) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है।
- इसकी हत्या करने पर 3 से 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
- यह गैर-जमानती अपराध है, जिसमें तत्काल गिरफ्तारी की जा सकती है।
- वन्यजीवों के अंगों की तस्करी या अवैध व्यापार पर भी समान कानूनी कार्रवाई होती है।
अंधविश्वास बनाम हकीकत
भ्रांति: सियार की खाल, दांत या अन्य अंग तंत्र-मंत्र में उपयोगी होते हैं।
हकीकत: इस दावे का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ऐसे अंधविश्वास केवल वन्यजीवों के शिकार और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाते हैं।
नतीजा: ऐसे अपराध में जेल, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।