सतीगेट स्थित ऐतिहासिक खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने के मुद्दे पर प्रशासन अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है। 5 सितंबर को प्रतिमा को अन्यत्र स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन सर्वसम्मति से स्पष्ट कार्ययोजना तय नहीं कर सका है। प्रशासन की इस अनिर्णय की स्थिति का असर मार्ग निर्माण से जुड़े अन्य कार्यों पर भी पड़ रहा है।
श्री खड़े हनुमान मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने बताया कि सतीगेट स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मंदिर में विराजित हनुमान जी की करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा लगभग 170 साल पुरानी बताई जाती है। मंदिर परिसर में करीब 1000 वर्ष पुरानी परमारकालीन प्रतिमा भी स्थापित है, जिससे इस स्थान का पुरातात्विक महत्व और बढ़ जाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों का कहना है कि इतने प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने में बेहद सावधानी बरती जानी चाहिए।
संतों और गुरुकुल के छात्रों का विरोध: महामंडलेश्वर और विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत गुरुकुल के बटुकों और छात्रों के साथ मंदिर स्थल पर पहुंचे। संतों ने प्रतिमा को स्थानांतरित किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह प्रतिमा करीब 200 वर्षों से यहां विराजमान है और इसे किसी भी स्थिति में स्थानांतरित नहीं होने दिया जाएगा।
जनआंदोलन और हस्ताक्षर अभियान: स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को यथास्थान बनाए रखने की मांग को लेकर मंदिर के पास बोर्ड लगाकर हस्ताक्षर अभियान चलाया। लोगों ने कहा कि प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने या बलपूर्वक हटाने का प्रयास किया गया तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
राजनीतिक विरोध: कांग्रेस विधायकों महेश परमार और दिनेश जैन सहित पार्टी के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने समर्थकों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रशासन पर जनभावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
सोशल मीडिया पर 'चमत्कार' का प्रचार: सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से प्रसारित हुआ कि मंदिर का बाहरी ढांचा हटाए जाने के बावजूद प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। इसके बाद दिल्ली, महाराष्ट्र और बिहार समेत अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुओं के 'अटल प्रतिमा' के दर्शन के लिए पहुंचने की बातें सामने आईं।