उज्जैन में पिछले साल की तरह इस साल भी समाजसेवी संस्थाएं और संगठन पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करेंगे। इस साल दो सावन मास होने पर सम्पूर्ण दिवस यह आयोजन होगा और अंतिम दिन सभी पार्थिव शिवलिंग का विधिवत पूजन अर्चन कर मां शिप्रा में विसर्जन किया जाएगा।
मौन तीर्थ पीठ के प्रमुख एवं महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि इस साल 19 साल बाद अधिकमास के कारण दो महीने के सावन का संयोग है। यह मास शिव भक्ति और शिव आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर मौन तीर्थ पीठ में चार जुलाई 2023 से 31 अगस्त 2023 तक सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण गंगाघाट मंगलनाथ मार्ग उज्जैन पर किया जाएगा। इसमें श्रद्धालु अपने हाथों से शिवलिंग बनाने से अनेक जन्मों के पापों का क्षय करने के साथ ही पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
इस दौरान मौन तीर्थ पीठ में विराजित भगवान गंगाधर सदाशिव का नित्य रुद्राभिषेक एवं लघुरुद्राभिषेक होगा। प्रत्येक श्रावण सोमवार और प्रदोष पर यहां विशिष्ट पूजन अनुष्ठान भी किए जाएंगे। महोत्सव में पूरे सावन मास शिव भक्तों द्वारा सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग बनाए जाएंगे, जिसमें भजन गायक रोहित चावरे की भजन संध्या भी आयोजित होगी।
पार्थिव शिवलिंग की पूजा के ये हैं लाभ...
मान्यता है कि सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने पर व्यक्ति के जीवन से जुड़ी बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर और कामनाएं पूरी होती हैं। पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने वाले शिव साधक के जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है। शिवपुराण के अनुसार, पार्थिव पूजा करने वाले साधक को भगवान शिव के आशीर्वाद से धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वह सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है।
पार्थिव पूजन से जुड़ी पौराणिक कथा...
मान्यता है कि भगवान शिव का पार्थिव पूजन सबसे पहले भगवान राम ने किया था। मान्यता है कि भगवान श्री राम ने लंका पर कूच करने से पहले भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी। मान्यता है कि कलयुग में भगवान शिव का पार्थिव पूजन कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया था, जिसके बाद से अभी तक शिव कृपा बरसाने वाली पार्थिव पूजन की परंपरा चली आ रही है। मान्यता यह भी है कि शनिदेव ने अपने पिता सूर्यदेव से ज्यादा शक्ति पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी।