दशहरा मैदान स्थित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर सोमवार को एक सरपंच गांव में स्कूल शुरू करवाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए।
भूख हड़ताल शुरू होते ही पूरे विभाग में हड़कंप मच गया, क्योंकि इस मांग को लेकर सरपंच पिछले चार वर्षों से लगातार शिक्षा विभाग के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान करने को कोई तैयार नहीं था। यही कारण रहा कि उन्होंने गांव के बच्चों के भविष्य को देखते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी।
ग्राम पंचायत उण्डासा में चार वर्ष पूर्व शारदा शिक्षण समिति द्वारा एक स्कूल का संचालन किया जा रहा था, लेकिन समिति के भंग हो जाने के बाद यह स्कूल बंद हो गया और तब से अब तक बंद पड़ा है। स्कूल बंद होने से गांव के बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ये बच्चे पिछले चार वर्षों से माधोपुर पढ़ने जा रहे हैं, जो गांव से लगभग तीन से चार किलोमीटर दूर है। इस रास्ते में रेलवे क्रॉसिंग और तालाब पड़ते हैं, जहां से बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है।
इसको लेकर सरपंच रमेशचंद्र शर्मा कई वर्षों से स्कूल को पुनः चालू कराने के लिए सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, पूर्व कलेक्टर और जिला शिक्षा विभाग से कई बार निवेदन कर चुके हैं। लेकिन जब बार-बार निवेदन के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया।
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सर्वे हुआ लेकिन स्कूल शुरू नहीं
वर्ष 2024 में शिक्षा विभाग द्वारा एक सर्वे कराया गया था और यह आश्वासन दिया गया था कि शीघ्र ही स्कूल शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन आज तक स्कूल प्रारंभ नहीं हुआ। स्कूल शुरू नहीं होने से गांव के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
स्कूल की सारी व्यवस्था करने को तैयार हैं सरपंच
सरपंच रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा स्कूल भवन उपलब्ध कराया जाएगा। फर्नीचर और अन्य सामग्री की व्यवस्था वे व्यक्तिगत रूप से अपने खर्च पर कर देंगे, लेकिन विभाग केवल शिक्षक और स्टाफ की नियुक्ति कर दे। इतनी सुविधा देने के बावजूद भी गांव के लगभग 50 बच्चों के भविष्य पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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शासकीय स्कूल खोलने के लिए डीपीआर भेजी जा चुकी है: एडीपीसी
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग के एडीपीसी गिरीश तिवारी का कहना है कि दो शिक्षकों के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण ग्राम उण्डासा का स्कूल बंद हो गया है। फिलहाल बच्चे माधोपुर जाकर पढ़ाई कर रहे हैं। शारदा समिति के जिम्मेदारों को स्कूल खोलने के लिए सरपंच के साथ बैठक करवा दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि इस स्थान पर शासकीय स्कूल खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके लिए कलेक्टर के माध्यम से डीपीआर भेज दी गई है। यदि यहां शासकीय स्कूल खुलता है, तो बच्चों को कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।