प्रशांत पुराणिक, कुलसचिव विक्रम विश्वविद्यालय
- फोटो : सोशल मीडिया
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व हुई पीएचडी चयन परीक्षा- 2022 में गड़बड़ उजागर होने के बाद शिकायतकर्ता बबलू खिंची ने फर्जी तरीके से नंबर बढ़ाने, फेल विद्यार्थी को पास करने सहित अन्य शिकायत लोकायुक्त को की थी। शिकायत की जांच में लोकायुक्त ने कुलसचिव के साथ में इससे सबंधित सभी अधिकारियों व शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए थे। यही नहीं लोकायुक्त ने आंसर शीट भी जांच के लिए मंगवाई थी। इस मामले में बुधवार को लोकायुक्त ने विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव, सहायक कुलसचिव, दो प्राध्यापक सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ 420 भ्रष्टाचार अधिनियम जैसी दर्जनों धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
मप्र युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव बबलू खिंची ने विक्रम विश्वविद्यालय में वर्ष 2022 में हुई पीएचडी प्रवेश परीक्षा में धांधली कर अपात्रों को पास करने की शिकायत लोकायुक्त को मय प्रमाण की थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने शिकायतकर्ता बबलू खिंची व कुलसचिव डॉ. प्रशांत पौराणिक सहित गोपनीय विभाग के अन्य अधिकारियों को लोकायुक्त कार्यालय बुलाकर बयान दर्ज किए थे। इसके साथ ही वो आंसर शीट भी जांच के लिए मंगवाई थी, जिनमें कांट-छांटकर नंबर बढ़ाए गए थे।
शिकायतकर्ता बबलू खिंची ने बताया कि लोकायुक्त को शिकायत के बाद भी कुलसचिव द्वारा पद का दुरुपयोग कर विद्यार्थियो की कोर्स वर्क परीक्षा करा ली गई। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस ने जांच के बाद विवि के कुलसचिव डॉ प्रशांत पौराणिक, सहा.कुलसचिव वीरेंद्र उचावरे, प्रो.पीके वर्मा, सहा. प्राध्यापक गणपत अहिरवार, शिक्षक डॉ. वायएस ठाकुर को 2022 में हुई विवि के इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी एंट्रेंस परीक्षा को लेकर प्राप्त शिकायत मे आरोपी बनाकर इनके खिलाफ धारा 420, 468, 471, 201, 120 बी, भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7 बी के तहत प्रकरण दर्ज किया है।