उज्जैन के बाबा गुमानदेव हनुमान मंदिर में भव्य रंगोत्सव मनाया गया, जहां भक्तों ने अबीर-गुलाल अर्पित कर होली खेली। चांदी की पिचकारी से टेसू के फूलों का रंग अर्पित किया गया। भक्तिमय माहौल में जयकारे गूंजे और शाही ठंडाई वितरित हुई। यह आयोजन सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
उज्जैन के पिपलीनाका रोड स्थित अति प्राचीन बाबा गुमानदेव हनुमान मंदिर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी रंगोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। मंदिर के गादीपति पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया कि शास्त्रोक्त रीति से मंत्रोच्चार के साथ बाबा गुमानदेव हनुमान महाराज को अबीर और गुलाल अर्पित कर होली खेली गई। चांदी की पिचकारी से टेसू के पुष्पों द्वारा तैयार रंग भगवान को समर्पित किया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप शाही ठंडाई का वितरण किया गया।
भक्तिमय माहौल और उल्लासपूर्ण आयोजन
मथुरा-वृंदावन की तरह उज्जैन के इस मंदिर में भी होली का उत्सव अत्यंत खास होता है। भक्तों की मान्यता है कि बाबा गुमानदेव स्वयं यहां विराजमान होकर श्रद्धालुओं के साथ होली खेलते हैं। होली के इस भव्य आयोजन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने अबीर, गुलाल और रंगों से एक-दूसरे को सराबोर कर होली की शुभकामनाएं दीं। पूरे क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी रंगों की धूम मची रही। इस दौरान मंदिर परिसर 'जय श्री हनुमान' और 'जय बाबा गुमानदेव महाराज' के जयकारों से गूंज उठा।
सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है यह पर्व
मंदिर के गादीपति पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास के अनुसार, यहां होली खेलने और बाबा गुमानदेव के दर्शन करने से पूरे वर्ष परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मंदिर में हर पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन होली का उत्सव विशेष होता है। भक्त पूरे वर्ष इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है, और हर साल श्रद्धालु उत्साहपूर्वक इसमें भाग लेते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे और परंपरागत तरीके से होली खेली। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।