उज्जैन जिले के नागदा क्षेत्र के चेतनपुरा निवासी रईस व उनकी पत्नी चांदनी मजदूरी करते हैं। कुछ माह पूर्व उन्हें पता चला कि उनकी 13 माह की पुत्री आशिका कुपोषण का शिकार हो गई। बच्ची को दस्त व बुखार होने की शिकायत पर उसके माता-पिता सिविल अस्पताल नागदा से जिला उज्जैन लेकर आए। इसके बाद डॉक्टरों ने बच्ची की जांच की और पाया कि आशिका को बुखार, दस्त के साथ-साथ एनीमिया भी है, उसे अस्पताल में भर्ती कर उपचार की आवश्यकता है। वह बेहद कमजोर भी है, उसका वजन मात्र 4 किलो 835 ग्राम ही था।
न्होंने कहा कि अगर एनीमिया, बुखार और दस्त के साथ-साथ आशिका के कुपोषण का पूरा उपचार किया जाता है तो उसे कुपोषण से दूर किया जा सकता है। चिकित्सक की सलाह पर आशिका के माता-पिता उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करवाकर पूर्ण उपचार करवाने के लिए सहमत हो गए।
दो सप्ताह तक चला इलाज
सिविल अस्पताल नागदा में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में आशिका को दो सप्ताह भर्ती रख आवश्यक उपचार एवं पौष्टिक आहार प्रदान किया गया। इस दौरान चिकित्सक डॉ. कुस्तुब देशपांडे एवं स्टाफ द्वारा पूर्ण निगरानी और उचित देखभाल की गई, जिसके फलस्वरूप आशिका कुपोषण से मुक्त हो सकी। उचित उपचार एवं निरंतर पोषण आहार प्रदान करने के कारण उसका वजन 5 किलो 700 ग्राम हो गया।
घर पर दिया जा रहा पोषण आहार
पोषण पुनर्वास केंद्र से डिस्चार्ज होने के बाद आशिका की मां को बच्ची को निरंतर पोषण आहार बनाकर खिलाने का प्रशिक्षण दिया गया। डिस्चार्ज के बाद घर पर पोषण आहार प्रदान किया जा रहा है। घर पर ही पोषण आहार मिलने से अब उसका वजन और बढ़ेगा। अब आशिका दूसरे बच्चों की तरह स्वस्थ्य जीवन जी रही है। आशिका के माता-पिता भी अब खुश है कि उनकी पुत्री कुपोषण जैसी गंभीर बीमारी से लड़कर उसे दूर कर सकी।