मातृछाया के पदाधिकारियों का कहना है कि मासूम बालिका से बात करने पर वह ग्रामीण भाषा में बात कर रही है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां किसी ग्रामीण क्षेत्र की हो सकती है।
मध्यप्रदेश के उज्जैन में सर्द रात में माता-पिता अपनी पांच वर्षीय दिव्यांग बालिका को बेसहारा छोड़कर चले गए। बालिका दोनों पैर से दिव्यांग है। कड़ाके की ठंड में शुक्रवार रात मक्सी रोड स्थित संस्था मातृछाया के बाहर बालिका अकेली पड़ी थी।
विज्ञापन
मातृछाया के पदाधिकारियों का कहना है कि मासूम बालिका से बात करने पर वह ग्रामीण भाषा में बात कर रही है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां किसी ग्रामीण क्षेत्र की हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि माधव नगर थाना पुलिस बालिका के परिजन की तलाश करने में लगी हुई है, लेकिन यदि उसके परिजनों की कोई जानकारी नहीं लगती है तो फिर मातृछाया ही इस बालिका की परवरिश करेगी।
सांसद पहुंचे मातृछाया
सर्द रात में जब पांच वर्षीय मासूम को मातृछाया के बाहर छोड़ जाने की जानकारी उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया को लगी तो वह तुरंत मातृछाया पहुंचे और मासूम बालिका को अपनी गोद में लेकर दुलार किया। मातृछाया के पदाधिकारियों ने जब सांसद को बताया कि मासूम बालिका के परिजनों को खोजने का प्रयास किया गया, लेकिन वह अब तक नहीं मिले है।
विज्ञापन
सांसद ने परिजनों से की यह अपील
सांसद अनिल फिरोजिया ने बालिका के परिजनों से आग्रह किया कि वे मासूम बालिका को अपने से दूर न करें। यदि अभिभावक इसे ले जाते हैं और दोबारा माता-पिता का प्रेम देते हैं तो बच्ची के उज्जवल भविष्य हेतु शिक्षा, उपचार और उसके लालन-पालन में आने वाले सभी खर्च वह खुद उठाएंगे। साथ ही उज्जैन सांसद ने यह भी आश्वासन दिया कि बच्ची के अभिभावक उसे ले जाना चाहते हैं तो उसे अपनी स्वेच्छा से ले जाएं। उन पर किसी भी प्रकार का दबाव या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।