35 साल रामू, 10 साल श्यामू और अब सुमा
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बाबा महाकालेश्वर की सवारी में इस बार आस्था के साथ एक भावुक बदलाव भी देखने को मिला। वर्षों से सवारी का हिस्सा रहे गजराज की परंपरा में अब नया नाम जुड़ गया है। करीब 35 वर्षों तक रामू और उसके बाद 10 वर्षों तक श्यामू ने बाबा महाकाल के नगर भ्रमण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों के चलते श्यामू को फिलहाल सवारी से ब्रेक दिया गया है। उसकी जगह अब तमिलनाडु से आई हथिनी सुमा ने संभाल ली है।
श्रावण के दूसरे सोमवार को जब बाबा महाकाल राजसी ठाठ-बाट और लाव-लश्कर के साथ नगर भ्रमण पर निकले तो सवारी मार्ग पर उमड़े लाखों श्रद्धालुओं की नजर एक नए मेहमान पर टिक गई। फूलों की बारिश, जयकारों, भजन मंडलियों, घोड़े, हाथी, तोप, पुलिस परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच सुमा पहली बार बाबा महाकाल की सवारी में शामिल हुई। हथिनी सुमा ने बाबा महाकाल के मनमहेश स्वरूप को अपने ऊपर विराजित कर नगर भ्रमण कराया। इसके साथ ही वह उज्जैन की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन गई।
निमोर्ही अखाड़े से जुड़े हथिनी सुमा के मालिक हेमंत बैरागी और उनके साथी सौरभ कुशवाह ने बताया कि सुमा की उम्र करीब 50 वर्ष है। 46 वर्ष की उम्र में उसे तमिलनाडु के त्रिची-पल्ली स्थित एक मंदिर से निमोर्ही अखाड़े, उज्जैन को दान किया गया था। अब सुमा बाबा महाकाल की सवारी में शामिल हो रही है, जो उनके लिए सौभाग्य की बात है।
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उन्होंने बताया कि सुमा की खुराक भी किसी राजसी मेहमान से कम नहीं है। उसके लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में फल, चारा, गन्ना, गुड़, घी और बाजरे की खिचड़ी की व्यवस्था की जाती है। सुमा को हर रोज करीब 100 किलो से अधिक फल, लगभग 50 चारे की पिंडियां, एक क्विंटल गन्ना, 10 किलो गुड़, एक किलो घी और करीब 10 किलो बाजरे की खिचड़ी दी जाती है।
उसके भोजन और देखरेख पर प्रतिदिन करीब 8 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। सुमा की देखभाल के लिए चार महावत तैनात रहते हैं, जिन्हें 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। वर्षों तक बाबा महाकाल की सवारी का हिस्सा रहे रामू और श्यामू के बाद अब हथिनी सुमा इस ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाती नजर आ रही है।