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उज्जैन: महाकाल लोक में साकार होगी ऋषि परंपरा, लाल बलुआ पत्थर से तराशी जा रहीं सप्तऋषियों की भव्य प्रतिमाएं

Mon, 31 Aug 2026 08:45 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

महाकाल लोक में अब फाइबर की पुरानी प्रतिमाओं की जगह राजस्थान के बंसी पहाड़पुर पत्थर से तैयार सप्तऋषियों, भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की भव्य मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। इनमें से अधिकांश प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं।
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सप्तऋषि की प्रतिमा का निर्माण कार्य
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विस्तार
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विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के महाकाल लोक की भव्यता में जल्द ही एक और आध्यात्मिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। परिसर में पहले स्थापित फाइबर की मूर्तियों के स्थान पर अब मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली पत्थर की भव्य कलाकृतियां स्थापित की जा रही हैं। नई योजना के तहत सप्तऋषियों, भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमाएं राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के ऐतिहासिक लाल बलुआ पत्थर से तैयार की जा रही हैं।

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इन कलाकृतियों को हरिफाटक स्थित हाट बाजार में आकार दिया जा रहा है। प्रतिमाओं के निर्माण में बंसी पहाड़पुर और बयाना स्टोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। खास बात यह है कि इसी प्रकार के विशेष पत्थर का इस्तेमाल अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है।

ध्यान और आशीर्वाद की मुद्रा में होंगी प्रतिमाएं
महाकाल लोक परिसर के लिए तैयार की जा रही प्रतिमाओं में महर्षि कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज के साथ भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति शामिल हैं। मूर्तिकार इन प्रतिमाओं को ध्यान, आशीर्वाद और शांति की मुद्राओं में तराश रहे हैं। माना जा रहा है कि इनके स्थापित होने के बाद श्रद्धालुओं को भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और ज्ञान की समृद्ध विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
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राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मूर्तिकार कर रहे निर्माण
इस विशेष परियोजना के लिए ग्वालियर और ओडिशा के अनुभवी मूर्तिकारों को जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मूर्तिकार ईश्वरचंद्र महाराणा और उनकी टीम पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इन प्रतिमाओं के निर्माण में जुटी है। वर्तमान में हरिफाटक पुल के पास स्थित हाट बाजार में सप्तऋषियों की अधिकांश प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं। अब उनके पेडस्टल और फिनिशिंग का काम अंतिम चरण में चल रहा है।

छह महीने में होगा इंस्टॉलेशन
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक संजीव कुमार मालवीय के अनुसार देश-विदेश के चुनिंदा शिल्पकारों को कार्यशाला के माध्यम से इस परियोजना से जोड़ा गया था। अधिकांश प्रतिमाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और अब पेडस्टल व फिनिशिंग का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग छह महीने के भीतर इन प्रतिमाओं को महाकाल लोक परिसर में विधिवत स्थापित कर दिया जाएगा।
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ऋषि परंपरा के भी होंगे दिव्य दर्शन
स्थायी और कलात्मक पत्थर की इन प्रतिमाओं के स्थापित होने के बाद महाकाल लोक की आध्यात्मिक भव्यता और बढ़ने की उम्मीद है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के साथ-साथ प्राचीन भारतीय ऋषि परंपरा और सनातन ज्ञान परंपरा की भी झलक देखने को मिलेगी।

 

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