इंदौर के खातीवाला टैंक स्थित हर्ष क्लिनिक में पेट दर्द का इलाज कराने आई 10 वर्षीय दिव्यांशी सोलंकी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर श्रीचंद मांगेचा पर गलत इलाज और लापरवाही का आरोप लगाते हुए देर रात क्लिनिक पर हंगामा किया।
इंदौर के गणेश नगर क्षेत्र की रहने वाली दस वर्षीय दिव्यांशी सोलंकी की इलाज के दौरान मौत का एक मामला सामने आया है। बच्ची के पिता का नाम मनोज सोलंकी है और यह परिवार मूल रूप से बागली के पुंजापुरा क्षेत्र का रहने वाला है। खातीवाला टैंक स्थित हर्ष क्लिनिक में इलाज के दौरान बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसने दम तोड़ दिया।
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पेट दर्द के चलते क्लिनिक पहुंची थी बच्ची
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार बच्ची को पिछले लगभग दस दिनों से पेट में दर्द की शिकायत थी। पेट दर्द से राहत दिलाने के उद्देश्य से उसकी मां रविवार दोपहर करीब तीन से चार बजे के बीच उसे खातीवाला टैंक के क्लिनिक लेकर पहुंची थी। परिजनों का कहना है कि वे बच्ची को सामान्य जांच और उपचार के लिए लाए थे, लेकिन वहां दिए गए इलाज के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी।
डॉक्टर पर गलत इलाज करने का आरोप
बच्ची के परिवार वालों ने क्लिनिक के डॉक्टर श्रीचंद मांगेचा पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि रविवार को उपचार दिए जाने के दौरान बच्ची की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई। घटना से व्यथित परिजन, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक देर रात क्लिनिक पहुंचे तथा वहां पहुंचकर विरोध जताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
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चिकित्सक ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर क्लिनिक के डॉक्टर श्रीचंद मांगेचा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है। चिकित्सक के अनुसार जब बच्ची को क्लिनिक लाया गया था, तब उसकी शारीरिक हालत पहले से ही काफी गंभीर बनी हुई थी। उन्होंने क्लिनिक की ओर से गलत इलाज दिए जाने के दावे को गलत करार दिया है।
जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद स्थिति होगी साफ
बच्ची की मौत असल में किस चिकित्सकीय कारण से हुई है और क्या इलाज में किसी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन हुआ है, यह सब पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल यह तय नहीं हो सका है कि मौत बीमारी की अत्यधिक गंभीरता की वजह से हुई या फिर इसमें इलाज की किसी चूक की भूमिका थी। परिजनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।