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गणेश विसर्जन मुहूर्त: अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को विदाई का शुभ समय आज, जानें शुभ और चर चौघड़िया तक के मुहूर्त

Fri, 25 Sep 2026 09:18 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

अनंत चतुर्दशी पर गणेशोत्सव का समापन होगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास ने गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए लाभ, अमृत, शुभ और चर चौघड़िया के मुहूर्त बताए हैं। साथ ही विसर्जन से पहले पूजा, पाथेय और मनोकामना कहने की परंपरा की जानकारी दी है।
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प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गणेशोत्सव के पावन पर्व का समापन अनंत चतुर्दशी के शुभ अवसर पर आज होने जा रहा है। श्री पार्थिव गणेश प्रतिमा के विसर्जन को लेकर बाबा गुमानदेव हनुमान गढ़ी, उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास ने शुभ चौघड़िया मुहूर्त जारी किए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शास्त्रीय मान्यताओं और अपनी सुविधा के अनुसार सही मुहूर्त में ही बप्पा को विदाई दें।
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ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गणेश प्रतिमा का विसर्जन सूर्यास्त से पूर्व कर लेना अत्यंत फलदायी माना गया है। विसर्जन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं।

गणेश प्रतिमा विसर्जन के शुभ मुहूर्त
  • प्रातः काल (लाभ मुहूर्त): सुबह 07:46 बजे से 09:17 बजे तक
  • प्रातः काल (अमृत मुहूर्त): सुबह 09:18 बजे से 10:48 बजे तक
  • दोपहर (शुभ मुहूर्त): दोपहर 12:18 बजे से 01:48 बजे तक
  • सायंकाल (चर मुहूर्त): शाम 04:50 बजे से 06:20 बजे तक
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अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू हुआ यह 12 दिवसीय उत्सव अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के साथ-साथ गणपति विसर्जन किया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी पर कई अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जिससे बप्पा की पूजा और विसर्जन से श्रद्धालुओं को कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होंगे।

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शास्त्रोक्त विसर्जन विधि और पाथेय की परंपरा
  • पूजा एवं आरती: विसर्जन के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर बप्पा की विधिवत पूजा करें। उन्हें फूल, माला, सिंदूर, अक्षत और मोदक अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर आरती उतारें।
  • पाथेय (यात्रा भोजन): बप्पा को विदा करने से पहले उनके साथ एक पोटली (पाथेय) बांधकर अवश्य रखें। धार्मिक मान्यता है कि देवलोक लौटते समय रास्ते में भोजन के लिए यह पोटली दी जाती है। इसके लिए लाल या पीले कपड़े में थोड़ा अक्षत, दूर्वा, सिक्का, सुपारी, मोदक और फल बांधकर बप्पा के साथ रखें।
  • मनोकामना पूर्ति का रहस्य: विसर्जन से ठीक पहले गणपति जी के दाहिने कान में अपनी मनोकामना कहने की विशेष परंपरा है। भक्त अपने हाथ से बप्पा का कान ढककर धीमी आवाज में अपनी प्रार्थना उनके सामने रखते हैं।
अंत में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए और 'अगले बरस तू जल्द आ' के जयघोष के साथ प्रतिमा का नदी, कुंड या जलाशयों में पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ विसर्जन करें।
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