पंडित अमर गुरु डब्बावाला, पंडित महेश शर्मा, पंडित आनंदशंकर व्यास
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पहले लगेगा अन्नकूट का भोग फिर जलाए जाएंगे दीपक और फुलझड़ियां
महाकालेश्वर मंदिर में रूप चौदस और दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर की सुबह मनाया जाएगा, जिसमें भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। यह अन्नकूट किसानों द्वारा दिए गए अन्न से बनाया जाता है, जिसे विशेष तरीके से कूटकर तैयार किया जाता है। दिवाली पर्व में लक्ष्मी पूजा भी धूमधाम से मनाई जाएगी। सुबह के समय भगवान को उबटन लगाया जाएगा, जिसे पुजारी परिवार की महिलाएं बनाती हैं। इसके बाद भगवान का गर्म जल से स्नान प्रारंभ किया जाएगा। महाकाल को गर्म जल से नहलाने का सिलसिला सर्दी के मौसम तक चलता है। दीपोत्सव के दौरान महाकाल मंदिर में दिये जलाए जाएंगे और फुलझड़ियां छोड़ी जाएंगी। हालांकि भक्तों की सुरक्षा के मद्देनजर फुलझड़ियों की संख्या 5 तक सीमित कर दी गई है।
ज्योतिषाचार्यों का भी यह है मत
दीपावली प्रदोषकाल व मध्यरात्रि में मनाया जाने वाला त्योहार है। इस बार 31 अक्टूबर को प्रदोषकाल व मध्यरात्रि के समय अमावस्या की साक्षी रहेगी। इसलिए 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाना श्रेष्ठ रहेगा।
- पं. आनंदशंकर व्यास, ज्योतिषाचार्य
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में दो पद्धति प्रचलित है, पहली गृह लाघवीय, दूसरी चित्रा केतकी पद्धति। गृह लाघवीय पद्धति से त्योहारों की गणना श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दृष्टि से 31 अक्टूबर को दीपावली मनाना सर्वथा उचित है।
- पं.अमर डब्बावाला, ज्योतिषाचार्य