चाहे कोई अभियान हो या फिर किसी त्योहार की तैयारी, उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह इन दिनों पूर्ण मुस्तैदी से सभी कार्यों को करते दिखाई दे रहे हैं। बात अगर गुरुवार की जाए तो उन्होंने सुबह सात बजे स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत हाथों में झाड़ू लेकर प्रशासनिक भवन की सफाई का काम किया था तो वहीं अन्य लोग इस अभियान से प्रेरित हो, इसलिए उन्होंने प्रशासनिक क्षेत्र में बने वाटर सप्लाई के चैंबर में उतरकर यहां भी सफाई की थी।
बता दें कि इसके बाद वे दिन भर अन्य कार्य भी करते देखे गए। लेकिन उनकी इस ऊर्जा के विपरीत तहसील कार्यालय में जैसे श्राद्ध पक्ष की सुस्ती छाई हुई है। सुबह तो ठीक दोपहर को भी एसडीएम कार्यालय में स्थित तहसील कार्यालय के कई विभागों के तो ताले भी नहीं खुल रहे हैं। शहरवासी और ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर यहां पहुंचते हैं, जिनमें से कुछ तो विभाग में लगे ताले देखकर ही लौट जाते हैं तो कुछ घंटों तक अधिकारियों के आने का इंतजार करते देखे जाते हैं।
प्रशासनिक भवन के सामने नवीन एसडीएम कार्यालय में तहसील कार्यालय बने हुए हैं। जब तक यह कार्यालय प्रशासनिक भवन में संचालित किए जाते थे, तब तक तो फिर भी ठीक था। लेकिन अब इन तहसील कार्यालयो में काम कछुए की गति से भी नहीं चल रहा है। सबसे ज्यादा स्थिति तो उज्जैन शहर की तहसीलदार रुपाली जैन के यहां खराब है। लोगों की शिकायत पर जब इस कार्यालय पर पहुंचा गया तो पता चला कि शाम 4:20 पर ही यहां कोई नहीं था।
सर्वर रूम, फौजदारी शाखा एवं प्रवाचक तहसील उज्जैन नगर के साथ ही सीएम हेल्पलाइन व लोक सेवा जैसे कार्यालय पर तो ताला लगा हुआ था। यही नहीं जो कार्यालय खुले हुए थे, उन कुर्सियों के अधिकारी भी घंटों से नदारद थे। यहां अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे लोगों ने काफी देर तक इन अधिकारियों के आने का इंतजार किया, लेकिन जब कोई नहीं आया तो यह लोग यहां से चले गए।
नहीं उठाया फोन...
तहसील कार्यालय की अव्यवस्थाओं को लेकर जब तहसीलदार उज्जैन शहर रुपाली जैन को उनके मोबाइल नंबर पर फोन लगाया गया तो काफी प्रयास करने के बावजूद भी उन्होंने फोन तक नहीं उठाया।
लोगों ने कहा, यहां फाइल चलती नहीं रेंगती है
क्योंकि तहसीलदार राजस्व संग्रह, राजस्व रिकॉर्ड, भूमि संबंधी मामलों का तत्काल निपटारा करने विकास योजनाओं को बनाने, ऋण वितरण, राशन वितरण के साथ अनेक कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इसीलिए उनके कार्यालय पर आने वालों की संख्या भी कुछ इतनी ही अधिक होती है। लेकिन इन कार्यालयों पर आने वाले लोग यहां पर चक्कर लगा लगाकर परेशान हो जाते हैं।
कुछ लोगों ने बताया कि सप्ताह के दो से तीन दिन तो छुट्टियों में ही चले जाते हैं। बाकी के अन्य दिनों में इन विभागों से फाइलें चलती नहीं बल्कि रेंगती है। जब प्रशासनिक भवन में यह कार्यालय संचालित होते थे, तब तो स्थिति फिर भी ठीक थी। लेकिन अब एक विभाग से दूसरे विभाग में फाइलें पहुंचने में ही महीनों लग जाते हैं।