बाबा महाकाल के दरबार में मनाए जाते हैं हर तरह के पर्व
अवंतिका नगरी में शैव और वैष्णव दोनों ही संप्रदाय के लोग रहते हैं। इनका अपना-अपना महत्व है। जब 12 वर्षों में एक बार सिंहस्थ आयोजित होता है, तो धार्मिक नगरी उज्जैन में शैव अखाड़े नदी की ओर लगाए जाते हैं और वैष्णव अखाड़े, जिन्हें रामा दल भी कहा जाता है, वे मंगलनाथ क्षेत्र में लगते हैं। शैव और वैष्णव संप्रदाय दोनों अपनी-अपनी परंपराओं को मानकर हमें मानवता का संदेश देते हैं, लेकिन विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इन दोनों ही परंपराओं को माना जाता है। बाबा महाकाल के नित्य होने वाले श्रृंगार में इन दोनों ही परंपराओं का समावेश देखा जा सकता है। श्रावण-भादो मास में निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी भी शैव और वैष्णव दोनों संप्रदाय के पर्वों को मानने वाले लोगों के लिए निकाली जाती है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि बाबा महाकाल के दरबार में शैव और वैष्णव दोनों संप्रदाय के प्रमुख पर्वों को मनाया जाता है। विशेष तौर पर श्रावण-भादो मास में निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी में इन दोनों संप्रदाय की तिथियों का समावेश देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि श्रावण मास के साथ ही बाबा महाकाल की दो सवारियां भाद्रपद में भी निकलती हैं, जिसमें अमावस्या से लेकर अमावस्या तक मराठा दक्षिणी ब्राह्मण यह श्रावण मानते हैं, इसलिए भाद्रपद में भी बाबा महाकाल की दो सवारियां निकालने का विधान वर्षों से चला आ रहा है। सवारी में भगवान के सभी मुखारविंद निकाले जाते हैं, जो इस सवारी को और भी दिव्यता प्रदान करते हैं।
पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि इस वर्ष बाबा महाकाल की सात सवारियां निकाली जाएंगी, जिसमें जैसे-जैसे सवारियां बढ़ेंगी, वैसे-वैसे बाबा महाकाल के मुखारविंद भी बढ़ते जाएंगे। अभी तक हाथी पर भगवान मन महेश, पालकी में भगवान चंद्रमोलेश्वर और गरुड़ पर शिव तांडव की प्रतिमा के दर्शन सवारी में श्रद्धालुओं को हो चुके हैं। चौथी सवारी में नंदी वाहन पर भगवान उमा महेश, पांचवीं सवारी में होलकर मुखौटा, छठी सवारी में सप्तधान मुखौटा और अंतिम शाही सवारी में बाबा महाकाल का घटाटोप मुखौटा श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए निकाला जाएगा।
पंडित महेश शर्मा ने बताया कि जितनी प्रतिमाएं सवारी में निकाली जाती हैं, वे सभी भगवान शिव की ही प्रतिमाएं और सभी भगवान शिव का ही साकार स्वरूप हैं। सभी स्वरूपों में भगवान शिव ही विराजमान हैं। यदि भक्त अपने मन में किसी भी प्रकार का अंतर न रखें तो उन्हें किसी भी प्रतिमा में बाबा महाकाल के दर्शन हो सकते हैं।
बाबा महाकाल के दरबार में मनाए जाते हैं हर तरह के पर्व