उज्जैन के लोगों पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। शहर में शनिवार से खुले दूध के दाम में 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। अब तक 62 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला खुला दूध 66 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलेगा।
दूध के दाम बढ़ाने का फैसला रिटेल दूध विक्रेता संघ की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। संघ के अध्यक्ष मोहन वासवानी ने बताया कि पशुचारे की बढ़ती कीमतों, परिवहन खर्च और दूध उत्पादन की लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था।
किसानों को भी बढ़ी हुई दर का लाभ
दूध विक्रेताओं ने उपभोक्ताओं के साथ पशुपालकों को भी राहत देने का फैसला किया है। संघ ने किसानों से दूध खरीदने की दर में 50 पैसे प्रति फैट की बढ़ोतरी की है। इसके बाद किसानों से दूध 9.70 रुपये प्रति फैट की दर से खरीदा जाएगा। बैठक में वरिष्ठ दूध विक्रेता राजेश जवर, प्रकाश खंडेलवाल, अशोक यादव और दिलीप बैरागी सहित संघ के कई सदस्य मौजूद रहे।
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रसोई के बजट पर बढ़ेगा असर
दूध के नए दाम लागू होने के बाद शहर के आम उपभोक्ताओं और गृहिणियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि पहले से महंगे खाद्य पदार्थों के बीच दूध के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। गृहिणी सुनीता शर्मा ने कहा कि सब्जियों और राशन के दाम पहले से ही काफी बढ़े हुए हैं। अब दूध पर भी 4 रुपये बढ़ गए हैं। चार-पांच सदस्यों वाले परिवार में रोजाना करीब 2 लीटर दूध लगता है। ऐसे में महीने का 250 से 300 रुपये तक अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।
स्थानीय निवासी विकास जैन ने कहा कि दूध महंगा होने का असर सिर्फ चाय या दूध तक सीमित नहीं रहेगा। दही, पनीर और मिठाइयों के दाम भी बढ़ सकते हैं। आम आदमी के घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं पशुपालक रमेश पटेल ने कहा कि विक्रेताओं ने किसानों के लिए फैट की दर 50 पैसे बढ़ाई है, यह अच्छी बात है। हालांकि खली और चारे के दाम काफी बढ़ चुके हैं इसलिए पशुपालन की लागत निकालना अब भी चुनौती बना हुआ है।