वर्ष 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में फांसी की सजा पाए दोषी मोहम्मद शफीक अंसारी को गुजरात हाईकोर्ट से 8 दिन की पैरोल मिली है। पैरोल मिलने के बाद गुजरात पुलिस की विशेष टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच उसके गृह नगर उज्जैन लेकर पहुंची है। शफीक को उज्जैन के मित्र नगर स्थित उसके घर में रखा गया है। उसकी आवाजाही और गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पैरोल की अवधि 8 अक्टूबर तक है। इसके बाद गुजरात पुलिस की टीम उसे वापस अहमदाबाद जेल ले जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के लिए जुटाएगा फंड
पुलिस पूछताछ के दौरान शफीक ने बताया कि उसे अपनी दोषसिद्धि और फांसी की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए पैरोल मिली है। पैरोल का मुख्य उद्देश्य कानूनी पैरवी के लिए फंड जुटाना और इस सिलसिले में लोगों से संपर्क करना है।
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उज्जैन और गुजरात पुलिस का संयुक्त पहरा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। थाना प्रभारी विवेक कनोडिया ने बताया कि पैरोल के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गुजरात पुलिस के गार्ड के साथ स्थानीय थाना पुलिस और पुलिस लाइन का पर्याप्त बल तैनात किया गया है। शफीक के घर के बाहर और आसपास के इलाकों में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। पुलिस उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
जानिए, कैसे हुए थे 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाके
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद शहर में महज 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच के दौरान पुलिस ने इस साजिश में शामिल होने के आरोप में उज्जैन निवासी कमरुउद्दीन नागौरी, मोहम्मद शफीक अंसारी, मोहम्मद अबरार और महिदपुर निवासी सफदर नागौरी को गिरफ्तार किया था। अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद से ये सभी अहमदाबाद जेल में सजा काट रहे हैं।